कभी-कभी रात को देर तक जागते हुए मैं अपनी ज़िंदगी के पन्ने पलटता हूँ।
कुछ पन्नों पर हँसी दर्ज है, कुछ पर चुपचाप बहते हुए आँसू।
लेकिन जितना आगे बढ़ते जाता हूँ, उतना ही साफ़ दिखने लगता है —
कि हर मुश्किल वक़्त में किसी न किसी रूप में कुदरत मेरे साथ खड़ी रही।
जब मैं छोटा था, गिरता-पड़ता, गलती करता —
माँ का हाथ मेरे सिर पर होता, और लगता कि
जैसे खुद भगवान ने मुझे माफ़ कर दिया हो।
आज समझता हूँ — वह सिर्फ़ माँ नहीं थी,
वह कुदरत का सबसे नर्म स्पर्श थी,
जो कहती थी — “डर मत, फिर से खड़े हो जाओ।”
ज़िंदगी में ऐसे दिन भी आए जब सब कुछ टूटता सा लगा।
किसी का साथ छूट गया, कुछ सपने अधूरे रह गए,
दिल ने कई बार हार मानने की सोची।
लेकिन उसी वक़्त कहीं दूर खेतों में खड़ा पेड़,
या बारिश के बाद चमकता आसमान,
या सांझ के वक्त घर लौटती चिड़िया
मुझे यह एहसास दिलाती रही —
कि हर अंत के पीछे एक नई शुरुआत छुपी होती है।
मैंने देखा है —
सबसे अंधेरी रातों के बाद ही सबसे उजली सुबह होती है।
और सबसे गहरे दुख के बाद ही
दिल में इंसानियत के लिए जगह बढ़ जाती है।
आज जब मैं अपने बीते सालों को देखता हूँ,
तो महसूस करता हूँ कि मेरी ज़िंदगी
सिर्फ़ मेरी मेहनत से नहीं बनी,
बल्कि उन अनदेखी शक्तियों से भी,
जो हर पल मुझे बचाती रहीं —
चाहे वो प्रकृति हो, माँ-बाप की दुआ हो,
या ऊपर बैठे किसी अदृश्य रचयिता का प्रेम।
मैंने सीखा —
किसी के साथ अच्छा कर दो,
पेड़ लगाओ, पंछियों को दाना डालो,
क्योंकि जितना हम कुदरत के करीब जाते हैं,
उतना ही दिल हल्का होता चला जाता है।
ज़िंदगी ने मुझे गिराया भी,
लेकिन हर बार किसी अदृश्य हाथ ने
मुझे फिर खड़ा कर दिया।
आज भी जब मन टूटता है,
मैं आसमान की तरफ देखता हूँ —
और महसूस करता हूँ कि कहीं न कहीं
मेरे लिए भी एक चमकती हुई किरण रखी गई है।
अगर मेरी ज़िंदगी ने मुझे कुछ सिखाया है,
तो बस इतना —
ज़िंदगी कभी दुश्मन नहीं होती,
हम ही कभी-कभी उसे समझने में देर कर देते हैं।
हर सांस एक तोहफ़ा है,
हर सुबह एक मौका,
और हर शाम — एक नई सीख।
अगर आप अपनी ज़िंदगी को लेकर थके हुए हों,
तो एक पल रुकिए,
आँखें बंद कीजिए,
और दिल से कहिए —
“धन्यवाद, हे कुदरत… तूने मुझे अब तक संभाल कर रखा।”
यकीन मानिए —
यह एहसास आपको भीतर से मजबूत कर देगा।

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