माता पिता हमारी ज़िंदगी में भगवान की तरफ से दिया हुआ एक अनमोल तोहफा हैं। बचपन में हमें अपने माता पिता पर कई बार गुस्सा आता था, पर शायद हम उस अनमोल तोहफे की अहमियत को अनदेखा कर देते थे। माता पिता का साया हमारे सिर पर भगवान के समान ही है। लोगों को कहते सुनते हैं कि हमने भगवान नहीं देखा, तो लोग उसके जवाब में बोलते हैं कि भगवान तो हमारे अंदर है, पर मैं कहता हूँ कि भगवान हमारे बाहर भी है। हमारे माता पिता किसी भगवान से कम नहीं हैं। बचपन में हमसे कई गलतियां हो जाती थी, जिनके बदले में हमें माँ बाप से मार भी खानी पड़ जाती थी। पर उस मार के पीछे उनका प्यार छुपा होता था, जो हमें कहीं न कहीं बुरे कामों से बचने के लिए होता था। वो मार हमारे लिए दवाई के समान होती थी, जो कड़वी तो ज़रूर थी, पर हमारे फायदे के लिए भी बहुत ज़रूरी थी। जब कभी हमें बुखार हो जाता था, तो डॉक्टर से इंजेक्शन लगवाने ले जाते थे। उससे हमें दर्द तो ज़रूर होता था, पर वो सिर्फ हमारी भलाई के लिए ही होता था। पिता एक ऐसा रिश्ता है जिसको कई नामों से बुलाया जाता है बापू, पिता, बा, बाब्बू, फादर, और आजकल डैड के नाम से जाना जाता है। नाम चाहे कोई भी हो, पर रिश्ता एक है। आजकल एक गीत बहुत मशहूर हो रहा है, ;बापू सेहत के लिए तू तो हानिकारक है; इस गीत में बापू को हानिकारक बताया गया है, क्यूंकि वो उनकी भलाई के लिए उनसे मेहनत करवाता है। हमें भी अपना बापू हानिकारक लगता था, जब वो हमें डांटता था, हमें झिड़कता था, कोई काम न करने की सलाह देता था। सारी ज़िंदगी कमरतोड़ मेहनत करने वाला बापू हमारे भविष्य की चिंता में डूबा रहता है। वो नहीं चाहता कि उनका बेटा भी उसकी तरह मज़दूरी करे, लोगों के खेतों में काम करे। बापू अपने सपनों को मार कर हमारे सपनों को जीवन देता है। कभी कभी हम सोचते हैं, कि हम अपने सपनों के बारे में सोचते हैं, कि मैं ये करूंगा, वो करूंगा। पर कभी सोचा है कि सुबह काम पर निकल जाने वाले बापू ने भी कभी सपने देखे होंगे। सुबह अपने बच्चों के उठने से पहले काम पर निकल जाने वाला बापू रात को बच्चों के सो जाने के बाद काम से वापस आता है। उसके लिये धुप छाँव, गर्मी सर्दी, बरसात, आंधी कोई मायने नहीं रखती। बाहर से कठोर दिखाई देने वाले बापू के अंदर की नरमाई शायद किसी ने जान पाई हो। खुद काँटों पर चल कर अपने बच्चों को कंधे पर बिठाकर, खुद फाटे कपडे पहन कर बच्चों को नए कपड़े दिलवाने वाला बापू कितनी मेहनत करता होगा। और हम उनसे बात करते हुए भी शरमाते हैं। कुछ दिन पहने ही हमारी गाय को चिचड़ लग गए थे, जिसके लिए मैंने गाय को इंजेक्शन लगाया। मुझे गाय को इंजेक्शन लगाते हुए महसूस हो रहा था कि इसे दर्द होगा, पर फिर भी मैंने उनको इंजेक्शन लगाया, क्यूंकि मैं जनता था कि ये इंजेक्शन लगाना उनकी भलाई के लिए है। अपनेी माँ बाप से प्यार करो, उनकी भावनाओं को समझो, ऐसा न हो कि कहीं समय निकल जाये और हमें पछताने के सिवा कुछ हासिल न हो।
सोशल मीडिया पर मैं एक पोस्ट देखी जिसमे पिता के कंधे पर बैठी उसकी बेटी को दिखाया गया है। वो फोटो मैं इसमें भी शेयर कर रहा हूँ।



