Tuesday, November 13, 2018

चंडीगढ़ में छठ पूजा के लिए लोगों से सज गयी झील


दिवाली का तयोहार लोगों ने बड़ी धूमधाम से मनाया। उसके बाद से ही छठ पूजा की तैयारियां शुरू हो गयी। वैसे हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ में छठ पूजा सिर्फ वही लोग मनाते हैं जो बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल की तरफ के रहने वाले हैं। बिहार में ये तयोहार बड़े ज़ोरों शोरों से मनाया जाता है।  गांव से चंडीगढ़ आने से पहले मुझे छठ पूजा के बारे में पता ही नहीं था कि ये भी कोई त्योहार होता होगा। चंडीगढ़ आने के बाद ही मुझे जानकारी हुई कि बाहर से आये लोग छठ पूजा बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। इस त्यौहार को मनाने लोग यहां से अपने गांव भी चले जाते हैं, पर जो अब पक्के तौर पर यहीं रहने लगे हैं, वो अपना त्योहार यहीं मनाते हैं।

चंडीगढ़ में सेक्टर 42 में ख़ास तौर पर तैयार की गयी झील में लोग इकठे हो जाते हैं। खरड़ में अज सरोवर को छठ पूजा के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बाज़ारों में छठ पूजा की तैयारी के लिए बड़े ज़ोर शोर से खरीददारी की जाती है। दिवाली की तरह ही बाजार खूब सजे होते हैं। हर तरफ गन्ने, टोकरियां, छाज, छोटे छोटे पौधे, केले की गढ़ और भी बहुत सारा सामान होता है पूजा के लिए। मैं भी आज छठ पूजा देखने गया। सभी ऑटो रिक्शा, मोटर साइकिल, और अपनी अपनी गाड़ियां ले के पूजा के लिए झील की तरफ जा रहे थे। मैंने सोचा कि मैं भी देखता हूँ कि वे कैसे पूजा करते हैं। मैं भी उनके पीछे पीछे झील के पास पहुँच गया। झील के पास तो जैसे मेला लगा हुआ था। बचे अपनी मस्ती में नाच गए रहे थे। और उनके माता पिता उनको साथ रहने की नसीहतें दिए जा रहे थे। उनको डर था कि कहीं वे भीड़ में खो ना जाएँ। 
सभी ने नए नए कपडे पहने हुए थे। लोग पूजा करने के लिए साथ लाये सामान को ठीक करके रख रहे थे।  लोगों ने झील के पास शामियाने भी सजाये हुए थे। DJ लगाए हुए थे। सामने बैठने के लिए कुर्सियां सजाई हुई थी। ऐसे ही 10-12 शामियाने लगे हुए थे। कई जगहों पर लाऊड स्पीकर लगे हुए थे जिनमे भोजा पुरी भाषा में छठ माता के गीत चल रहे थे। चंडीगढ़ पुलिस के सिपाही भी अपनी ड्यूटी दे रहे थे। वे लोगों पर लगातार नज़र रखे हुए थे, कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाये। क्यूंकि ऐसे मौके पर कुछ शरारती लोग शरारत कर जाते हैं। मैं भी एक तरफ खड़ा लोगों को देख रहा था। वहीं कुछ लोग झील के किनारे फ़ोन से सेल्फियां खींच रहे थे। मैंने भी कुछ फोटोज खींचे। 
हर त्योहार का अपना अपना महत्व होता है। मुझे वैसे इस त्योहार के बारे में बहुत ज्यादा तो नहीं पता है। पर इन त्योहारों को देखकर लगता है कि लोगों में कितनी श्रद्धा होती है। और हमें उस श्रद्धा का सन्मान करना चाहिए। क्यूंकि किसी न किसी बहाने से ही सही लोग एक साथ एक जगह पर इकठे तो होते हैं वैसे तो आज कल काम में उलझे लोगों के पास अपनों से मिलने का भी समय नहीं है। छठ पूजा के बारे में पूरी जानकर लेकर इस त्यौहार का इतिहास भी आप लोगों के साथ किसी दिन ज़रूर शेयर करूंगा।


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