Monday, November 5, 2018

दिवाली में मार्किट की चहल पहल के अनोखे रंग

आज दिवाली के तयौहार की तैयारियां बड़े ज़ोर शोर से बाजार में देखी जा सकती हैं। हर तरफ रौनक ही रौनक नज़र आती है। हर किसी के लिये ये दिवाली का पर्व अलग अलग नज़रिये से मायने रखता है। पुरे भारत देश में दिवाली की आमद एक खास महत्व रखती है। पुरे साल का ये सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। 

कहते हैं कि इस त्यौहार के बाद सभी त्यौहार ख़त्म हो जाते हैं। फिर अगले साल से नए त्यौहार फिर शुरू हो जायेंगे। दिवाली सभी के लिए किसी न किसी रूप में खास होता है। आज बाजार में जाकर मैंने देखा कि सभी अपनी तयारियों में लगे हुए हैं। लोग बाज़ारों में अपनी अपनी दुकान के आगे स्टाल लगा रहे थे। चंडीगढ़ सेक्टर 41 कि कृष्णा मार्किट में गया तो वहां का नज़ारा कुछ और ही नज़र आया। कुछ दुकानदार अपनी दुकान लगाने के लिए जगह ढूंढ रहे थे। तो कुछ ने सड़क किनारे ही अपना सामान रखा हुआ था। कुछ लोग बिजली की लड़ियाँ लगा रहे थे। 

एक जगह दुकान लगाने के लिए लोगों की लड़ाई हो रही थी। एक औरत ने अपनी एक चारपाई डाल कर उस पर कपडे, शाल, चुन्नी, दुपट्टा, और भी बहुत कुछ रखा हुआ बेचने के लिए। उसके पास वाले ने चारपाई पर ही कुछ खाने का सामान रखा हुआ था। शायद वो एक दूसरे को अपनी दुकान उठाने के लिए बोल रहे थे। मैं कुछ देर खड़ा उनको देखता रहा। थोड़ी देर बाद वो औरत अपने साथ वाले दुकानदार के पास बंधी हुई रस्सी से अपने बेचने के सामन को ये कहते हुए उतर रही थी कि ठीक है, मैं ही उठा लेती हूँ दुकान, तू मोटा हो जा दुकान लगा के। मैं ही चली जाती हूँ। पर शायद वो गयी कहीं नहीं थी, उसने कुछ सामान उतारा, फिर ऐसे ही छोड़ दिया। तभी उसके पास कुछ लड़कियां कुछ सामान खरीदने आ गयी। शायद इसलिए उनका मामला कुछ ठंडा पड़ गया। औरत धीरे धीरे उस दुकानदार को गालियां ज़रूर निकल रही थी। 

मैं भी वहां से आगे चल पड़ा। एक तरफ एक लड़का मिटटी के दीपक लिए बैठा था। उसने भी अभी अभी अपनी दुकान सैट की थी। उसका बड़ा भाई उसको सब चीजों के रेट बता रहा था, शायद उसे किसी दूसरी जगह दुकान लगाने जाना था। एक जगह चाय की दुकान लगी हुई थी। पहले तो मन किया कि चाय पी लेता हूँ फिर सोचा कि पहले मार्किट घूम लूँ, उसके चाय पियूँगा। फिर मैंने एक दुकान पर रंगोली बनाने वाले सामान के बारे में पूछा तो उसने पैकेट दिखाए। फिर मुझे कहता कि अगर खुला सामान लेना है तो दूसरी दुकान से ले लो, मैंने सोचा कि अपना सामान बेचने कि बजाए दूसरी दुकान पैर क्यों भेज रहा है। 

तभी उसने कहा कि वो हमारी ही दुकान है। मैंने सोचा कि दिवाली पर कुछ लोग त्यौहार मनाने कि वजह से खुश होते हैं, और कुछ लोगों को अपनी आजीविका के लिए दुकान लगाने की ख़ुशी होती है। क्यूंकि उनके लिए भी ये एक सुनहरी मौका होता है अपनी आय बढ़ाने का। सभी चाहते हैं कि इस दिवाली पर उनकी आय में बढ़ोतरी हो जाये तो उनकी दिवाली भी अच्छी तरह से मन जाएगी। फिर मैंने रंगोली बनाने के कुछ पैकेट और दो फैंसी चिराग लिए। 

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