कल सुबह मस्जिद की लाउड स्पीकर में अनाउंसमेंट की गई थी कि अंबाला को लॉक डाउन कर दिया है है। सभी अपने अपने घरों में रहें। पर आज सुबह से पूरे हरियाणा को ही लॉक डाउन कर दिया गया। सभी अपने अपने घरों पर बन्द रहने को मजबूर हो रहे हैं। कल एक यह अनाउंसमेंट भी गई थी कि राशन डिपो में राशन दिया जाएगा, सुबह सभी गांव वासी राशन ले आएं। आज सुबह नहा धोकर तैयार हुआ चंडीगढ़ जाने के लिए, पहले तो घर वाले ही मना कर रहे थे कि अभी नहीं जाना, सख्ताई बहुत है।
भाई तो सुबह तैयार होकर अंबाला अपने काम पर चला गया। आज राशन डिपो से राशन लेने भी जाना था। पिता राशन कार्ड ले कर डिपो में चले गए, मुझे बोला कि मैं फोन कर दूंगा की भीड़ कम है तो आ जाना। क्यूंकि राशन लेने के लिए फिंगरप्रिंट लगाना पड़ता है। आधे घंटे बाद हम भी चले गए। डिपो में बहुत भीड़ लगी हुई थी। वैसे भी 5 लोगों से अधिक के इकठ्ठा होने पर पाबंदी लगाई हुई है। तो खतरा महसूस होता है कि अगर भीड़ में गए तो कहीं कोई इंफेक्शन ना हो जाए। हम काफी देर बाहर सड़क पर ही खड़े रहे। आखिर एक घंटे बाद हमारी बारी आ गई। सभी ने अपने अपने तरीके से मुंह को ढका हुआ था। किसी ने मास्क पहने हुए थे तो किसी ने अपने तौलिए से मुंह को ढक रखा था। फिर भी सभी एहतियात बरत रहे थे।
राशन ले के हम घर आ गए। लगा जैसे कि किसी खतरे से बाहर आ गए हैं। घर आ कर हमने हाथ धोए फिर चाय पी। घरवाली ने कहा कि हमें गोरखा स्कूल में जाना पड़ेगा, कुछ सामान लेकर आना है। स्कूल की छुट्टियां होने के कारण अध्यापकों को होमवर्क घर से ही करने को कहा गया है। 10 बजे हम स्कूल के लिए निकल पड़े। घरवाली को स्कूटी सीखनी है। इसलिए पहले तो स्कूटी घरवाली ने है चलाई। उस मोड़ पर डर लगता है। ठोल में हाईवे पर जाकर उसने स्कूटी मुझे दे दी। जाते हुए हम डर भी लग रहा था कि कहीं पुलिस वाले हमें जाने से ना रोक दें। खैर हमें पुलिस वाले नहीं मिले। अजरवर जाकर हमने एक दूसरी मैडम को साथ लिया और हम तीनों स्कूल चले गए। करीब आधा घंटा वहां लगा होगा। फिर हम डॉक्युमेंट्स लेकर वापस आ गए। फिर में बाइक पर अड्डे की तरफ चला गया। वहां सभी दुकानें बन्द थी। एक मेडिकल स्टोर खुला हुआ था। मेरी माता जी ने कहा कि अड्डे पर फक्कर (हम उस शुरू से ही फ़क्कर ही कहकर बुलाते हैं। असली नाम मुझे पता नहीं है) की दुकान से चावल ले के आने हैं। में दुकान पर गया तो देखा रास्ते में डिपो में अभी भी बहुत भीड़ लगी हुई थी। आगे गया तो स्कूल के प्लेग्राउंड में लड़के वालीबॉल खेल रहे थे। सोचा कि इनके लिए कोरोनावायरस का डर ही नहीं है। फिर मैं दुकान पर पहुंचा तो वहां एक दुकान और भी खुली हुई थी। दुकान वाले से चावलों के बारे में पूछा तो उसने कहा कि चावल खत्म हो गए हैं। फिर मैं वापस आ गया।
गांव में दूध की डायरी हमारी दूध वाली कैन पड़ी थी। उस लेने दुकान पर गया तो देखा कि पास में चाचा की दुकान किरयाने की दुकान है। उन्होंने अपनी दुकान के आगे सावधानी बरतते हुए एक डंडा इस तरीके से लगाया हुए था कि कोई उस डंडे से आगे ना जा सके। मुझे उस देख कर लगा कि इसकी तो फोटो खींचने चाहिए। तभी फोटो खींच ली। चाचा के लडके सोनू ने कहा कि कहानियां अच्छी लिखी थी। मैंने कहा कि दो तीन दिन से घर में फ्री बैठे हैं । कुछ करने के लिए काम नहीं है तो सोचा यही लिख लें। फिर हमने डेयरी से कैन ली और घर वापस आ गए। कोरोनावायरस खतरा हर तरफ नजर आ रहा है।
