Saturday, June 20, 2020

आज का मैच कुछ अजीब था, पर था मज़ेदार

पानी में गेंद गिरने पर डंडे से निकालते हुए खिलाड़ी

आज एक बार फिर मैच खेलने निकल पड़े। अब किसी के पास समय ना होने के कारण कुल दो चार ही इकट्ठे हो पाते हैं। हम भी पांच ही थे। अब मुश्किल थी सबको दो टीम में बांटने की। दो दो की टीम तो बन गई परन्तु एक को बांटना मुश्किल था तो सभी ने उसे दोनों टीमों में सांझा रख लिया। किस खेत में पहले मैच खेला था अब उस खेत को जोत दिया था। तो हमने मैच खेलने के लिए एक नई जगह ढूंढ ली। वो एक गडरियों का बाड़ा था। एक तरफ बाड़े में दो तीन भूस के कूप बांधे हुए थे, कुछ इंटों का एक ढेर लगा हुआ था। बाड़े के पिछले हिस्से में बकरियां पर भेड़ों का बाड़ा बनाया हुआ था जिसमें 20-25 बकरियां और भेड़ें थी। उनके लिए लकड़ियों की एक जाली बनाई हुई थी। वहीं एक तरफ दीवार के साथ काफी डूंघा खदान था जिसमें पानी भरा हुआ था। बाड़े के सड़क वाली तरफ नाला बनाया हुआ था जो पानी से भरा हुआ था। दोनों टीमें मैच खेलने के लिए तैयार थी। दोनों पहले बैटिंग करने के लिए तैयार हो गई। तभी एक ईंट से टॉस किया गया। ईंट के एक तरफ प्लेन और एक तरफ खड्डा था। एक टीम ने खड्डा चुन लिया। टॉस जीतने पर दूसरी टीम ने बैटिंग चुनी। अक्सर इन टीमों में जो भी टॉस जीतेगी वहीं बैटिंग करेगी। गेंदबाजी कोई टीम चुनने पसंद नहीं करती।

बकरियों के बाड़े में गेंद को ढूंढता हुआ एक खिलाड़ी ख़ुशी
हमने गेंदबाजी के लिए अपनी फिल्डिंग सजा ली। मैदान के दोनों तरफ घर थे। इसलिए बोला गया कि को भी इन घरों में शॉट मरेगा को आउट हो जाएगा, पानी में गेंद गई तो भी आउट। कूप के पीछे कांटों में गेंद गई तो एक रन मिलेगा। पानी वाली तरफ सूखे में गेंद गई तो भी एक रन दिया जाएगा। आखिर मैच शुरू हो गया। सभी अपनी पोजिशन संभाले खड़े थे। मैच शुरू होने पर पहली गेंद ट्राई ज़रूर डालनी है। एक दो गेंद खेलने के बाद अक्सर गेंद पानी में गिर जाती थी। इसका भी इंतजाम किया हुआ था। पानी में से गेंद निकालने के लिए एक डंडा रखा हुआ था। डंडा कांटों वाला था जिसमें आगे जाली सी बनी हुई थी। गेंद निकलते हुए हाथों में कांटे चुभ जाए थे। फिर सभी ने एक दूसरा डंडा ढूंढा जो बांस का था। उससे गेंद निकालने में आसानी होने लगी। 
कितनी भी आराम से खेलने की कोशिश पर गेंद पानी में चली ही जाती थी। फिर सभी वहां इकट्ठे हो जाते। कई बार गेंद नीचे गारे में ही फंस जाती थी, तब उसको ढूंढने में थोड़ा समय ज्यादा लग जाता था। शॉट मारने वाले को डांटा जाता था कि थोड़ा ध्यान नहीं रख सकता था। एक बार विजय ने शॉट मेरा तो घरों को पार करता हुआ गली में जा गिरी। सभी ढूंढने गए। अंधेरा भी बढ़ने लगा था। पहले घर के अंदर पशुओं के बाड़े में भी ढूंढा तो नहीं मिली, गली के पार खेत में, नाले में, गली के पास खड़े घास में भी ढूंढा पर गेंद नहीं मिली। फिर सोचा कि चलो छोड़ो, अब नहीं मिलेगी। फिर एक दो बार और नजर मारी तो रोहित को घास में पड़ी गेंद नज़र आ गई। सभी के चेहरे खिल गए पर अब अंधेरा हो चुका था। गेंद को उठाया और अपने अपने घरों को चल पड़े। सभी को कल गिर मैदान में आ कर खेलने का न्योता भी दिया गया।

Saturday, June 13, 2020

कई सालों बाद मिला थोड़ा सा मौका, मैच का एक दिन

आज ज़िन्दगी का वो दिन सामने आया जो बीते हुए कई साल हो गए थे। की दिनों से गर्मी ने पसीने छूटवाए हुए हैं। तेज धूप में घर से बाहर निकलने का मन ही नहीं करता। आज दोपहर 12 बजे के आसपास बादलों ने कुछ देर के लिए सूर्य को अपने काले धब्बों से ढक लिया जिससे तेज धूप से आग बरसाती किरणें कुछ देर के लिए रुक गई। हवा ने भी अपना रुख कुछ उग्र कर लिया और तेज गति से चलने लगी। थोड़ी देर में ही तेज हवा ने आंधी का रूप ले लिया। घर के बाहर रस्सियों पर धूप में सूखने के लिए टांगे हुए कपड़े उड़ने लगे तो सभी ने अपने अपने घर के बाहर से कपड़े उतार लिए। शायद किसी का एक दो कपड़ा उड़ भी गया हो। छोटे छोटे बच्चों ने लिफाफे के साथ रस्सी बांध कर हवा में उड़ाने का मौका भी मिल गया। एक तरह से उन्होंने इसे पतंग का रूप दिया था जिसे हवा में उड़ने लगे। एक दूसरे के पतंग रूपी लिफाफे की रस्सियां एक दूसरे से उलझ गई जिससे उनकी आपस में लड़ाई भी हो गई। समझा बुझा कर उन्हें चुप करवाया।
थोड़ी देर बाद भांजा ख़ुशी मेरे पास आया और बोला कि चलो मैच खेलने चलते हैं। क्रिकेट मैच मेरा पसंदीदा खेल था जो हम बहुत खेला करते थे। धूप छांव, गर्मी सर्दी, यहां तक कि बरसात भी इसे खेलने से रोक नहीं सकती थी। बस क्रिकेट खेलना है तो खेलना है। खेतों में तीन डंडे गाड़कर विकेट बना कर या ईंटें रखकर खेलते थे। आज भी वहीं दिन वापस आ गया परंतु वो साथी नहीं थे जो उस समय खेलते थे। सभी अपने अपने कामों में व्यस्त हो गए हैं। मैंने भी आज लगभग 15-16 साल बाद क्रिकेट मैच खेलने का मौका मिला। हम 6 लोग थे जो मैच खेलने उतरे। पास ही खेत में बरसात का पानी सूख चुका था। कहीं कहीं गीला रह रहा था। सभी डंडे, बैट और गेंद लेकर पिच बनाने की तैयारी करने लगे। पिच के लिए अच्छी सी जगह नहीं मिल रही थी। क्यूंकि खेत वालों ने खेत में कुर्डी वाली खाद बिखेरी हुई थी जिसमें गोबर होता है। जो सुख कर ढेले से बन गए थे। सभी ने पिच के लिए उन को थोड़ा साफ करके पिच बना दी। तीन तीन की दो टीमें भी तैयार हो गई। 4-4 ओवर का मैच खेलने की तैयारी हो गई। सभी अपनी अपनी पुजिशनें संभालने लगे। आज ऐसा लग रहा था जैसे वो ही दिन वापस आ गए हों। पर पुराने साथियों की कमी खल रही थी। पहले मैच खेलने के लिए सभी समय से इकट्ठे हो जाते थे और घर वालों से गालियां भी कहानी पड़ती थी। आज भी समय की कमी के कारण हमने सिर्फ तीन मैच ही खेले। धीरे धीरे गर्मी फिर से बढ़ने लगी थी। आज भी वैसी ही स्थिति बन रही थी जैसी पहले मैच खेलते हुए बनती थी। एक दूसरे से उलझ जाना, गलत फैसला सुनाने पर अंपायर के साथ लड़ाई करना। आज के मैच में हम सिर्फ 6 लोग ही थे, जिस कारण आज हमने फिल्डिंग भी इकट्ठी कि हुई थी और ना ही फैसला सुनाने के लिए कोई अंपायर बनाया हुआ था। विकेट कीपिंग, बैटिंग, बॉलिंग सभी अपने आप ही करनी पद रही थी। बॉलर को ही फिल्डिंग करके दूर से गेंद को उठने जाना पड़ता था। कई बार तो गेंदबाज को ही गेंद उठा कर देनी पड़ती थी। मैच खेलते खेलते वहां पर कई बच्चे इकट्ठे हो गए। सभी गर्मी में थोड़ी राहत मिलने के कारण बाहर खेलने का मौका मिला था। उन सबको मैदान से बाहर करने के लिए चीखते चीखते गला भी दुखने लगा। उनको बाहर जाने के लिए गला फाड़ फाड़ कर बोलते पर बच्चे तो किसी की भी नहीं सुन रहे थे। फिर मैंने अपने फोन में समय देखा तो 3 बज कर 30 मिनट हो चुके थे। अब मुझे अपने पशुओं को चारा डालने भी जाना था। थोड़ी देर और डर हो जाती तो मा से गालियां सुननी पड़ी सकती थी। इसलिए हम सभी अपना बैट, गेंद और विकेट वाले डंडे उठा कर अपने अपने घरों को चल दिए। पर आज मैच खेल कर।ऐस लगा जैसे कई साल बाद फिर से वही दिन वापस आ गए हों पर दोस्तों कि कमी से अधूरा अधूरा सा लग रहा था। थोड़ी बहुत संतुष्टि के साथ हम सभी घरों को लौट आए।

उम्मीद का दीया

  एक घर में पाँच दीये जल रहे थे।  उनकी रोशनी से पूरा घर जगमगा रहा था। हर दीया अपने भीतर एक अलग संदेश और एक अलग भावना लिए हुए था। पहला दीया उ...