थोड़ी देर बाद भांजा ख़ुशी मेरे पास आया और बोला कि चलो मैच खेलने चलते हैं। क्रिकेट मैच मेरा पसंदीदा खेल था जो हम बहुत खेला करते थे। धूप छांव, गर्मी सर्दी, यहां तक कि बरसात भी इसे खेलने से रोक नहीं सकती थी। बस क्रिकेट खेलना है तो खेलना है। खेतों में तीन डंडे गाड़कर विकेट बना कर या ईंटें रखकर खेलते थे। आज भी वहीं दिन वापस आ गया परंतु वो साथी नहीं थे जो उस समय खेलते थे। सभी अपने अपने कामों में व्यस्त हो गए हैं। मैंने भी आज लगभग 15-16 साल बाद क्रिकेट मैच खेलने का मौका मिला। हम 6 लोग थे जो मैच खेलने उतरे। पास ही खेत में बरसात का पानी सूख चुका था। कहीं कहीं गीला रह रहा था। सभी डंडे, बैट और गेंद लेकर पिच बनाने की तैयारी करने लगे। पिच के लिए अच्छी सी जगह नहीं मिल रही थी। क्यूंकि खेत वालों ने खेत में कुर्डी वाली खाद बिखेरी हुई थी जिसमें गोबर होता है। जो सुख कर ढेले से बन गए थे। सभी ने पिच के लिए उन को थोड़ा साफ करके पिच बना दी। तीन तीन की दो टीमें भी तैयार हो गई। 4-4 ओवर का मैच खेलने की तैयारी हो गई। सभी अपनी अपनी पुजिशनें संभालने लगे। आज ऐसा लग रहा था जैसे वो ही दिन वापस आ गए हों। पर पुराने साथियों की कमी खल रही थी। पहले मैच खेलने के लिए सभी समय से इकट्ठे हो जाते थे और घर वालों से गालियां भी कहानी पड़ती थी। आज भी समय की कमी के कारण हमने सिर्फ तीन मैच ही खेले। धीरे धीरे गर्मी फिर से बढ़ने लगी थी। आज भी वैसी ही स्थिति बन रही थी जैसी पहले मैच खेलते हुए बनती थी। एक दूसरे से उलझ जाना, गलत फैसला सुनाने पर अंपायर के साथ लड़ाई करना। आज के मैच में हम सिर्फ 6 लोग ही थे, जिस कारण आज हमने फिल्डिंग भी इकट्ठी कि हुई थी और ना ही फैसला सुनाने के लिए कोई अंपायर बनाया हुआ था। विकेट कीपिंग, बैटिंग, बॉलिंग सभी अपने आप ही करनी पद रही थी। बॉलर को ही फिल्डिंग करके दूर से गेंद को उठने जाना पड़ता था। कई बार तो गेंदबाज को ही गेंद उठा कर देनी पड़ती थी। मैच खेलते खेलते वहां पर कई बच्चे इकट्ठे हो गए। सभी गर्मी में थोड़ी राहत मिलने के कारण बाहर खेलने का मौका मिला था। उन सबको मैदान से बाहर करने के लिए चीखते चीखते गला भी दुखने लगा। उनको बाहर जाने के लिए गला फाड़ फाड़ कर बोलते पर बच्चे तो किसी की भी नहीं सुन रहे थे। फिर मैंने अपने फोन में समय देखा तो 3 बज कर 30 मिनट हो चुके थे। अब मुझे अपने पशुओं को चारा डालने भी जाना था। थोड़ी देर और डर हो जाती तो मा से गालियां सुननी पड़ी सकती थी। इसलिए हम सभी अपना बैट, गेंद और विकेट वाले डंडे उठा कर अपने अपने घरों को चल दिए। पर आज मैच खेल कर।ऐस लगा जैसे कई साल बाद फिर से वही दिन वापस आ गए हों पर दोस्तों कि कमी से अधूरा अधूरा सा लग रहा था। थोड़ी बहुत संतुष्टि के साथ हम सभी घरों को लौट आए।
Saturday, June 13, 2020
कई सालों बाद मिला थोड़ा सा मौका, मैच का एक दिन
आज ज़िन्दगी का वो दिन सामने आया जो बीते हुए कई साल हो गए थे। की दिनों से गर्मी ने पसीने छूटवाए हुए हैं। तेज धूप में घर से बाहर निकलने का मन ही नहीं करता। आज दोपहर 12 बजे के आसपास बादलों ने कुछ देर के लिए सूर्य को अपने काले धब्बों से ढक लिया जिससे तेज धूप से आग बरसाती किरणें कुछ देर के लिए रुक गई। हवा ने भी अपना रुख कुछ उग्र कर लिया और तेज गति से चलने लगी। थोड़ी देर में ही तेज हवा ने आंधी का रूप ले लिया। घर के बाहर रस्सियों पर धूप में सूखने के लिए टांगे हुए कपड़े उड़ने लगे तो सभी ने अपने अपने घर के बाहर से कपड़े उतार लिए। शायद किसी का एक दो कपड़ा उड़ भी गया हो। छोटे छोटे बच्चों ने लिफाफे के साथ रस्सी बांध कर हवा में उड़ाने का मौका भी मिल गया। एक तरह से उन्होंने इसे पतंग का रूप दिया था जिसे हवा में उड़ने लगे। एक दूसरे के पतंग रूपी लिफाफे की रस्सियां एक दूसरे से उलझ गई जिससे उनकी आपस में लड़ाई भी हो गई। समझा बुझा कर उन्हें चुप करवाया।
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