Tuesday, October 28, 2025

आज मेरी बाइक ने नहाया — और शहर में तहलका मचा दिया!”

(लेखक:  Suresh Kumar)


सुबह-सुबह जैसे ही आँगन में कदम रखा, मेरी नजर अपनी प्यारी बाइक पर पड़ी — धूल से लथपथ, टायरों पर मिट्टी की परतें, और शीशे पर “धो मुझे प्लीज़” लिखा हुआ था। 


लगा जैसे वो मुझसे कह रही हो —
“भाई, तेरा क्या है, तू तो रोज नहा लेता है, पर मैं तो दो महीने से रेगिस्तान बनी पड़ी हूँ!”

सच कहूँ, जब मैंने उसे देखा तो शर्म आ गई।
सोचा, चलो आज इस बिचारी को भी इंसानियत दिखा दूँ। 
बाल्टी में पानी भरा, शैम्पू निकाला (जो शायद बाइक से ज़्यादा मैं खुद पर इस्तेमाल करता हूँ), और शुरू हो गया उसका “स्पा सेशन”।


 पहला छींटा – बाइक का बदला!

जैसे ही पानी का पहला छींटा मारा, बाइक ने ऐसा छींटा वापस उछाला कि मेरी टी-शर्ट पर सीधा निशाना लगा।
लगा जैसे कह रही हो —
“अबे, तू भी ले मज़ा मेरे साथ! सिर्फ मैं ही गंदी क्यों रहूँ?”

फिर मैंने ब्रश से टायर घिसे, हैंडल पोंछा, और सीट पर झाग लगाई।
अचानक लगा, ये बाइक तो आज अपने ससुराल जाने की तैयारी कर रही है — इतनी चमक तो शादी के दिन भी नहीं थी!


 दूसरा पड़ाव – बाइक का रूपांतरण

धोते-धोते जब सूरज थोड़ा ऊपर आया, बाइक की बॉडी ऐसे चमकने लगी जैसे नई शादी की साड़ी।
पड़ोसी पास से गुज़रा और बोला —
“भाई, नई बाइक ले ली क्या?”
मैंने कहा — “नहीं, बस पुरानी को धो दिया है।”
वो बोला — “अच्छा है, अब खुद को भी धो ले!”

हम दोनों हँस पड़े, पर मन ही मन मुझे अपनी बाइक पर गर्व महसूस हुआ।
इतनी चमक तो मेरी खुद की मुस्कान में भी नहीं थी।


 तीसरा मोमेंट – बाइक का एटीट्यूड

जैसे ही बाइक सूखी, मैंने किक मारी —
और एक दमदार ढूं...ढूं...ढूं...! की आवाज़ निकली।
मुझे लगा जैसे वो कह रही हो —
“अब बताओ, कौन बाईक सुंदर है पूरे मोहल्ले में?”

सड़क पर निकली तो हवा खुद रुककर पूछ रही थी —
“भाई, ये कौन सी ब्रांड है?”
और बच्चे पीछे से चिल्ला रहे थे —
“देखो, हीरो की बाइक जा रही है!”


 क्लाइमेक्स – बाइक का स्वैग

अब हालत ये थी कि बाइक खुद को सुपरमॉडल समझने लगी।
ट्रैफिक सिग्नल पर खड़ी होकर बगल की बाइक से कहती —
“देख भाई, नहाना ज़रूरी है। चमक दिखेगी तो इज्जत मिलेगी!”

और मैं सोच में पड़ गया —
कई बार इंसान भी तो बाइक की तरह होता है — जब तक खुद को साफ न करे, चमक नहीं आती।
बस ज़िंदगी का धूल झाड़ते रहो, और खुद को हर दिन नया महसूस करो।



अब मेरी बाइक रोज सुबह मुझसे पूछती है —
“आज फिर नहलाओगे क्या?”
और मैं कहता हूँ —
“अरे मैडम, रोज़ नहीं, वरना फिर मुझे ही जलन होगी तुम्हारी चमक से!”



क्या आपकी बाइक भी हफ्तों से धूल में लिपटी खड़ी है?
तो जनाब, उसे भी एक बार नहला दीजिए —
क्योंकि कभी-कभी बाइक की सफाई से ज़्यादा दिल की सफाई ज़रूरी होती है!

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