Tuesday, October 28, 2025

सर्दियों की सुबह और हरे साग की खुशबू

सर्दियों की वो कड़कड़ाती सुबह थी — जब ओस की बूंदें पत्तों पर ऐसे चमक रही थीं, मानो किसी ने मोतियों की माला बिखेर दी हो। सूरज अभी पूरी तरह निकला नहीं था, लेकिन गांव की पगडंडियों पर लोगों की चहल-पहल शुरू हो चुकी थी। हर कोई अपने-अपने खेतों की ओर बढ़ रहा था। मैं भी अपने पिता और चाचा जी के साथ साइकिल पर खेत की राह पकड़ चुका था। 


खेत में पहुंचते ही ठंडी हवा का झोंका चेहरे से टकराया — ऐसा लगा जैसे किसी ने बर्फ का पानी उड़ा दिया हो। पर जैसे ही नजर हरे-भरे खेतों पर पड़ी, सारी ठंड पल भर में गायब हो गई। सामने फैला हुआ हरियाली का संसार — सरसों, बथुआ, पालक और मेथी के पौधे ओस की बूंदों से नहाए हुए, मानो धरती ने हरी चादर ओढ़ रखी हो।

हमने टोकनियां निकालीं और साग तोड़ना शुरू किया। उंगलियां ठंड से सुन्न थीं, लेकिन जब साग की नर्म पत्तियों को छुआ, तो एक अजीब सी गर्माहट महसूस हुई — जैसे प्रकृति खुद अपने हाथों से सर्दी का एहसास मिटा रही हो। चाचा जी मुस्कुराते हुए बोले,
“सर्दी में साग का मज़ा ही कुछ और है — और अगर खुद तोड़ा हो, तो स्वाद दोगुना!”

धीरे-धीरे सूरज की सुनहरी किरणें खेतों में उतरने लगीं। ओस की बूंदें चमक उठीं, और खेतों में जीवन जैसे झिलमिला उठा। तभी पास ही से एक चायवाले की घंटी की आवाज आई। हम सबने वहीं खेत के किनारे मिट्टी के कुल्हड़ों में गर्म-गर्म चाय का आनंद लिया। ठंडी हवा, मिट्टी की खुशबू और चाय की भाप — उस सुबह की याद को आज भी दिल के कोनों में ताज़ा कर देती है।

सारे साग इकट्ठा करने के बाद हमने मां के लिए एक पोटली अलग की, जिससे वो घर जाकर ताज़ा साग बनाएंगी। घर लौटते हुए साइकिल की टोकरी में रखी हरी पत्तियाँ हवा में लहराती जा रही थीं — जैसे वो भी खुश हों कि किसी ने उन्हें सहेजा है, अपनाया है।

वो सुबह सिर्फ खेतों की नहीं थी, वो याद थी अपनत्व की, मेहनत की, और उस सुकून की जो शहर की भागदौड़ में कहीं खो गया है।


क्या आपने भी कभी सर्दी की सुबह खेतों में साग तोड़ा है? अगर हाँ, तो चलिए — फिर से चलते हैं उन मीठी यादों की गलियों में, जहाँ हर सांस में मिट्टी की सोंधी खुशबू घुली रहती है।  शहर की भागदौड़ में आज जब बाज़ार से साग लाते हैं, तो वो खेत वाली ताजगी और अपनापन कहीं खो गया लगता है। मगर उन सुबहों की गर्माहट, वो मिट्टी की खुशबू, और अपने हाथों से तोड़ा गया साग — अब भी दिल को सुकून दे जाता है। 


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