Saturday, August 23, 2025

“धान की कटाई और खेतों की वो शामें”

✍️ लेखक: L. Suresh Kumar

गाँव की सुबहें बड़ी अलसाई होती थीं, लेकिन धान की कटाई का मौसम जैसे ही शुरू होता, पूरा गाँव जैसे जाग उठता था। चारों ओर हल्की धुंध, ओस से भीगे खेत, और दूर से आती दरांती चलने की आवाजें...। उन्हीं दिनों की एक याद आज भी दिल को गुदगुदा जाती है।

मेरी माँ सुबह सबसे पहले उठ जाती थी। हाथ में दरांती, सिर पर गमछा, और आँखों में मेहनत की चमक। हम बच्चे सोते-सोते माँ की आवाज सुनते थे – “जल्दी उठो, आज खेत पर खाना लेकर आना है।” हम भाई-बहन मिलकर मिट्टी का चूल्हा सुलगाते, माँ रोटियाँ सेंकती, आलू-टमाटर की सब्जी बनती और दोपहर तक सारा खाना एक टिफिन में भर दिया जाता।

दोपहर होते ही मैं और मेरी बहन खाने का टिफिन लेकर खेत की ओर निकलते। रास्ता लंबा होता था — कहीं ईंटों का टूटा रास्ता, कहीं खेतों की मेंड़, और कहीं-कहीं कीचड़। लेकिन हमें मस्ती करनी होती थी — पगडंडियों पर दौड़ते, गन्ने चुराते, और खेत में फिसलते-गिरते हुए माँ तक पहुँच जाते।

माँ और दूसरी औरतें खेत में झुकी हुई होतीं, धान काटतीं, पसीने में तर-ब-तर लेकिन चेहरे पर संतोष होता। जब हम खाना देते, माँ सिर पर हाथ फेरकर कहती, “चलो पहले तुम लोग खा लो, फिर हम सब साथ खाएंगे।”

शाम होते-होते पूरा खेत सुनहरा हो जाता था — जैसे धूप भी अब धान के रंग में रंग गई हो। कहीं-कहीं पिता जी और दूसरे मर्द भी आ जाते, गठरियाँ बाँधी जातीं, सिर पर उठाई जातीं, और बैलों की गाड़ी पर रखी जातीं। बच्चे वहीं मेंड़ पर खेलते — मिट्टी में पैर डालकर गिल्ली-डंडा या कंचे।

जब रौशनी कम होने लगती, हम सब मिलकर घर की ओर लौटते। माँ के चेहरे पर थकान होती, लेकिन दिल में संतुष्टि की चमक। रास्ते भर हम खेतों में टिड्डियों को पकड़ते, आसमान के रंग देखते, और एक-दूसरे की थकान को हँसी में बदल देते।


“धान की कटाई सिर्फ एक काम नहीं थी, वो एक त्योहार था मेहनत और ममता का।

माँ की दरांती, हमारी टिफिन की थाली, और खेतों की वो सजीव साँझें — सबने मिलकर हमारे बचपन को स्वाद और संवेदना से भर दिया।
अब धान के खेत भले ही कम हो गए हों, लेकिन उन दिनों की यादें आज भी हमारी स्मृतियों में लहलहा रही हैं…”


🪔 क्या आपने भी कभी खेत में माँ के लिए खाना पहुँचाया है? या धान की कटाई के मौसम की कोई प्यारी याद है?

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🎉 अगली कहानी — "खेतों की मेड पर बैठकर गुड़-चने की दावत" — जल्द आ रही है। जुड़े रहिए!

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