Wednesday, August 27, 2025

गाँव की वो शादी और तूफ़ान की रात”

✍️ लेखक: L. Suresh Kumar

शादी का माहौल था। गाँव के चौधरी के बेटे की बारात थी और पूरे गाँव में जैसे कोई मेला लग गया हो। हर गली रंग-बिरंगी झालरों से सजी थी, चौपाल पर बैंड-बाजे की गूंज, और औरतों के गीतों की मिठास हवा में घुली हुई थी। हम भी अपने सबसे अच्छे कपड़े पहनकर, बालों में तेल लगाकर, पूरी तैयारी के साथ शादी में पहुँचे।

शाम होते-होते बारात घर आई। घोड़ी पर दूल्हा, आगे-आगे बैंड, पीछे-पीछे बाराती और उनके झूमते कदम। लेकिन तभी अचानक आसमान में अजीब सी खामोशी छा गई। दूर क्षितिज पर काले-काले बादल उमड़ते हुए दिखे। सबने सोचा, "शायद हल्की फुहार होगी... सावन का मौसम है।"

पर ये फुहार नहीं, तूफ़ान था!

बारात जैसे ही मंडप तक पहुँची, एक तेज़ झोंका आया और बिजली की कड़क के साथ हवाओं ने सबको झकझोर दिया। पंडाल की टेंटें उड़ने लगीं, लाइटें झपकने लगीं, और लोग इधर-उधर भागने लगे। खाना अभी ठीक से परोसा भी नहीं गया था कि बारिश ने आकर सारी तैयारी धो डाली।

घूँघट में बैठी दुल्हन अंदर कमरे में सहमी हुई थी। और दूल्हा? उसकी पगड़ी आधी उड़ चुकी थी, पर वो मुस्कुरा रहा था।

हम बच्चों के लिए तो जैसे ये शादी नहीं, कोई एडवेंचर फिल्म बन गई थी! कोई टेंट पकड़े खड़ा था, कोई भीगते हुए पकौड़े खा रहा था, और कुछ लोग ट्रैक्टर की ट्रॉली में बैठकर सुरक्षित ठिकाने तक पहुँचने की कोशिश कर रहे थे।

पर गाँव वालों का जुगाड़ भी कम नहीं। थोड़ी ही देर में लोगों ने बांस, तिरपाल और रस्सियों से नया पंडाल खड़ा कर दिया। गैस लाइटें जलाई गईं, ढोल फिर से बजे, और थोड़ी ही देर में दोबारा शादी शुरू हो गई।


"वो शादी सिर्फ दूल्हा-दुल्हन की नहीं, गाँव की हिम्मत और एकता की भी मिसाल बन गई। आँधी-तूफ़ान सब कुछ उड़ाकर ले जा सकता है, पर गाँव की खुशियाँ और जज़्बा — उन्हें कोई नहीं हिला सकता।"

🌧️ क्या आपने भी किसी शादी में ऐसा तूफ़ान देखा है, जहाँ पंडाल उड़ जाए लेकिन लोग मुस्कुराते रहें?
👣 चलिए लौटते हैं गाँव की गलियों में, “Meri Zindgi” ब्लॉग पर — जहाँ हर कहानी में छुपी है एक याद, एक मुस्कान।

No comments:

Post a Comment

उम्मीद का दीया

  एक घर में पाँच दीये जल रहे थे।  उनकी रोशनी से पूरा घर जगमगा रहा था। हर दीया अपने भीतर एक अलग संदेश और एक अलग भावना लिए हुए था। पहला दीया उ...