आज सुबह सोकर उठा तो मौसम का मिजाज कुछ ठीक नहीं लग रहा था। रात को जब सोए तो मच्छरों ने ठीक से नींद नहीं आने दी। मच्छरों ने जगह जगह काट कर बुरा हाल कर दिया। रात में गर्मी भी बहुत लग रही थी। एक छत वाला पंखा और एक कूलर भी गर्मी को भागने नाकाम हो रहे थे। सुबह उठते ही मौसम का मिजाज देखा तो कुछ राहत सी मिली। धूप कम थी, और बादल से छाए हुए थे। फिर मैंने हर रोज की तरह फोन उठाया और फेसबुक खोल की।
फेसबुक पर मेरे एक दो दोस्तों ने लाइव वीडियो डाल रखी थी, जिससे देखकर कुछ सुकून मिला और आस जगी कि यहां भी शायद यही वाला मौसम बन जाएगा। फेसबुक पर डाली वीडियो में कुराली और चंडीगढ़ के आसपास के इलाके में बहुत तेज हवा चल रही थी। एक दो जगह बरसात हो रही थी। एक दोस्त ने वीडियो डाली थी, दिन में ही अंधेरा हो रहा था। वीडियो देख देख कर मेरा मा हिंडोले ले रहा था। फिर एक वीडियो में देखा तो छोटे छोटे ओले पड़ रहे थे। फिर में अपने बिस्तर से उठा और मुंह हाथ धोए। सुबह का नाश्ता किया।
अब 8 बज चुके थे। मैं बार बार आसमान की तरफ देखे जा रहा था कि कहीं कोई बदली आए और बरस पड़े। मैंने गली में बताया कि वहां पर बारिश हो रही है, कहीं पर तेज हवा चल रही है। थोड़ी देर में ही मौसम का मिजाज बिगड़ने लगा। हवा भी तेज होने लगी थी।
धीरे धीरे घरों से निकाल कर लोग गली में हवा का आनंद लेने आ निकले थे। मैं और चाचा का लड़का संजय सड़क पर चले गए। थोड़ी ही देर में।धूल भरी आंधी चलने लगी। लोगों ने भूस बांधने के लिए रखा हुआ था। वो आंधी में उड़ने लगा। तभी चाचा के घर से एक थैला उड़ कर गली में आ गया। मैंने दौड़ कर उस थैले को उठाया और घर में रखने के लिए दरवाज़ा खोलने लगा। एक बार तो मुझे लगा कि अंदर से दरवाजे कि कुण्डी लगी हुई है। पर जैसे ही मैंने थोड़ा सा और जोर लगाया तो दरवाज़ा खिलने लगा। हवा का प्रवाह इतना तेज था कि दरवाज़ा खुल ही नहीं रहा था। जैसे तैसे करके मैंने थोड़ा सा दरवाज़ा खोला और थैला अंदर रख दिया।
सड़क पर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे हवा हम भी अपने साथ उड़ा ले जाएगी। धीरे धीरे आंधी कम होने लगी और मोटी मोटी बूंदें गिरने लगी। ठंडी ठंडी बूंदे शरीर को ठंडक दे रही थी। थोड़ी देर में बारिश शुरू हो गई। हमारी गाएं बाहर ही बंधी हुई थी। ओले पड़ने के डर से मैं गायों को अंदर बरामदे में बांध आया। मन जैसे एकदम खिला हुआ था। घर में एक जगह टिकने का मन ही नहीं कर रहा था। कभी गली में आ जाता, कभी सड़क पर चला जाता। बिजली भी चली गई थी। घर में पूरा अंधेरा पसर गया था। बादलों की गड़गड़ाहट मन को भाव विभोर कर रही थी। अब बूंदें बारीक हो गई थी परन्तु पहले से तेज होने लगी थी। अब दिल कर रहा था कि गरमा गर्म चाय पी जाए। थोड़ी देर में में रसोई में चाय बनाने चला गया। अब बाहर बूंदाबांदी हो रही है और रसोई में चाय बन रही है। ......
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