आज सुबह से ही में फेसबुक पर मां दिवस से सबंधित पोस्ट देख रहा था। सभी अपने अपने तरीके से मां को सलाम कर रहे थे। मां को याद कर रहे थे। उन सबके साथ मैंने भी अपनी मां की पोस्ट को फेसबुक पर शेयर किया। आज मां दिवस के रूप में मनाया जाने वाला ये दिन सोशल मीडिया पर मां के नाम होता है। सुबह से ही फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर सभी सोशल साइट्स पर लोगों ने अपनी मंटके साथ फोटोज, यादें ताजा की हैं। टिक टोक पर तो मां के गाने चल रहे हैं।
एक बार मैं अपनी चप्पल निकालने के लिए गहरे जोहड़ में उतर गया। उसके बाद को पिटाई हुई थी वो उस मां की अपने बेटे के लिए एक चिंता थी। इन सब बातों का अहसास हमें तब हुआ जब हम खुद माता पिता बने।
अपने हिस्से का बचाकर अपने बच्चों को खिलाने से खुद की भूख भी मिट सकती है, ये हमने अब जाना।
मेरी मां हमें अपने साथ खेत में काम करने को बोलती थी, जो हमें अच्छा नहीं लगता था। पर अब अहसास हुए कि उनका ये कदम हमें आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाना था। उनका अपने बच्चों को डांटने का अधिकार हमेशा रहता है।
आज मेरे एक दोस्त ने फेसबुक पर एक पोस्ट डाली, जिसमे लिखा था कि आज उस व्यक्ति ने भी अपनी मां को नमन किया है, फेसबुक पर मां की फोटो डाल कर मां दिवस की शुभकानाएं दे रहे हैं। चलो किसी ना किसी बहाने ही सही, अपनी मां को याद तो किया। हमें शुक्र मनाना चाहिए कि हमें डांटने के लिए हमारे मां बाप हमारे साथ हैं
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