Saturday, May 30, 2020

लॉक डाउन में चंडीगढ़ की गेढ़ी, खट्टी मीठी

आज लॉक डाउन में थोड़ी छूट मिलने से चंडीगढ़ जाने का सबब बना। मुझे घर आए हुए 2 महीने से ज्यादा समय हो गया है। सोचा था कि सुबह जलदी जाऊंगा जिससे गर्मी में चल रही लू से बचा जा सके। लेकिन सुबह जल्दी जाने के सारे प्रयास फेल हो गए। घर के कामों को निपटाने के बाद आखिर जाने का समय आ ही गया। गर्मी भी बढ़ गई थी। धूप भी बढ़ती जा रही थी। दोपहर को 12 बज चुके थे। अंबाला पार करके प्यास सताने लगी। शंभू बॉर्डर पार करके पंजाब में दाखल हो गया। मेरा दिल दुआ कर रहा था कि कहीं ठंडे पानी की छबील मिल जाए। पर अभी शायद छबील लगने का समय भी नहीं आया था। थोड़ा आगे जाने पर रामनगर गांव में सड़क पर ही लोगों ने ठंडे पानी कि छबील लगाई हुई थी। मानो भगवान ने वहां मेरी दुआ सुनकर तुरन्त वहां छबील लगवा दी हो। मैंने पानी पिया और भगवान का शुक्रिया करके आगे बढ़ चला। उससे आगे कहीं भी पानी की छबील नहीं मिली।  


मोहाली पहुंच कर सबसे पहले एलआईसी के दफ्तर में जाकर फॉर्म को चैक करवाया और फिर खरड़ में दोस्त के पास चला गया। परंतु शायद वो अपने काम में बहुत मशरूफ था। इसलिए थोड़ी देर बैठने के बाद में वापस आ गया और अपने कमरे पर चला गया। शाम को दोस्त रंजीत सिंह काका जी को फोन मिलाया। सामने से आवाज आईं, "हैलो सुश"। वो मुझे फोन पर जब बात करते हैं तो इसी लहजे में बुलाते हैं। 

फिर उसने कहा कि आज तो में बाहर आया हूं, (शायद वो रोपड़ गए हुए थे) कल सुबह मिलते हैं। फोन काटने के बाद कमरे पर जाने रास्ते में ढाबे से पैक करवा के लाया हुए खाना खाया। ढाबे वाले ने मुझसे कहा था कि लॉक डाउन की वजह से यहां बैठकर खाना नहीं खिला सकते। इसलिए आपको पैक करके ले जाना होगा। खैर मैंने खाना खाया और थोड़ी देर आराम किया। शाम को 6 बजे मैं कमरे से बाहर निकला। चाय पीने का में कर रहा था। मार्केट में गया तो कहीं भी चाय वाला नहीं मिला। सभी दुकानें बन्द हो चुकी थी। फिर किसी से पूछने पर पता चला कि शाम को साढ़े पांच बजे सभी दुकानें बंद हो जाती हैं। सिर्फ सब्जी वाली रेहड़ी फड़ी ही मिलती है, वो भी थोड़ी देर के लिए। फिर मैंने आधा दर्जन केले लिए रात के लिए। क्यूंकि अब खाने को तो कहीं कुछ नहीं मिलेगा। 


रात को सोने का समय आ चुका था। मैंने कूलर में पानी डाला परंतु उस समय टेंशन बढ़ गई जब पानी वाला पंप नहीं चला। कूलर चल रहा था, इतना ही शुक्र मनाने के बाद मैं सी गया। गरमी ने बुरा हाल किया हुआ था। 
रात को सोते हुए एक तरफ तो कूलर की हवा लग रही थी, परंतु दूसरी तरफ पसीने से तर बतर था। फिर करवट बदल कर दूसरी तरफ हवा लगवा कर पसीना सुखाता तो दूसरी तरफ पसीना आ जाता। यही प्रक्रिया सारी रात चलती रही। 

जैसे तैसे सुबह हो चुकी थी। मैं नहा कर तैयार हो गया। बाहर मार्केट में जाकर चाय पी। फिर एलआईसी के दफ्तर में चला गया। दफ्तर में दाखिल होने से पहले सिक्योरिटी गार्ड ने मुझे सेनेटाइजर से हाथ साफ करने को कहा और मशीन से मेरा टेंप्रेचर चैक करने के बाद मुझे अंदर जाने दिया। दफ्तर में अपना काम खत्म करने के बाद में वापस आ गया। थोड़ी देर कमरे पर आराम करने चला गया। बहुत तेज गर्मी ने आज भी मुझे पसीने से तरबतर कर दिया। मुझे अभी से सोच होने लगी थी कि रात को फिर से वही हाल होगा, जो पिछली रात को हुए था। मैंने सोचा कि आज रंजीत के पास जाकर सो जाऊंगा। मैंने सोचा कि शायद वहां एसी लगा हो तो अच्छी नींद आ जाएगी।



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