Wednesday, May 6, 2020

कुछ रिश्ते ही अजीब होते हैं...

ज़िन्दगी में कुछ रिश्ते कितने अजीब होते हैं। हमारी समझ से परे। ज़िन्दगी इन रिश्तों के सहारे चलती हैं, जैसे रिश्तों के बिना ज़िन्दगी उलझ सी जाती है। कुछ रिश्ते जाने पहचाने तो कुछ अनजान होते हैं। पर अनजान रिश्तों कि महक भी जाने पहचाने रिश्तों जैसी ही होती है। कुछ लोग हमारी ज़िन्दगी में आए बिना भी हमारी ज़िन्दगी का हिस्सा बन जाते हैं। हम बचपन से रिश्तों में बंधे चले आते हैं। अभी कुछ दिन पहले बॉलीवुड एक्टर ऋषी कपूर और इरफान खान इस दुनिया को अलविदा कह कर चले गए। 

जिस दिन मुझे इरफान खान के कैंसर से निधन होने की बात चली तो मुझे लगा जैसे मेरी ज़िन्दगी का एक रिश्ता दा टूट गया। इरफान खान एक बहुत अच्छे एक्टर थे। मैंने उनकी कई फिल्में देखी। इरफान खान की अदाकारी का में कायल था। सबसे पहले मैंने उनको डीडी नेशनल पर आने वाले धारावाहिक चंद्रकांता में देखा था। उसमे इरफान खान ने बद्रीनाथ का रोल निभाया था। तब मुझे एक्टिंग के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता था। मुझे उसकी शक्ल भी अच्छी सी नहीं लगती थी, जैसे आंखें बाहर की तरफ सी रहती थी। पर जैसे जैसे हम बड़े हुए तो एक्टिंग के बारे में थोड़ी बहुत समझ आनी शुरू हुई। कई फिल्मों में उनकी एक्टिंग  देखी। फिल्म पन सिंह तोमर में उनको देखकर मुझे लगता था कि शायद ये असली व्यक्ति है जिसके बारे में ये फिल्म बनी है। मुझे लगा कि डायरेक्टर ने असली पन सिंह तोमर को ही फिल्म में शूटिंग करने के लिए शामिल किया था। हिंदी मीडियम फिल्म में उनकी हिंदी और अंग्रेजी के बारे में लड़ाई का जवाब नहीं। 

इरफान खान की फिल्म मदारी की तो बात ही अलग है। उनकी ये फिल्म देखकर मेरी आंखों में आंसु गए थे। सरकार की नीतियों और भ्रष्टाचार के उपर बनाई फिल्म मदारी में सचमुच ही गजब की एक्टिंग की थी। उनके हर डायलॉग पर मुझे भावुकता महसूस होती थी। 

इरफान खान के निधन से अगले ही दिन ऋषी कपूर का निधन हुए तो लगा कि बॉलीवुड को किसी की नजर लग गई है। ऋषी कपूर की फ़िल्मे हम बचपन से देखते आ रहे हैं। मेरे चाचा का लड़का संजय बिल्कुल ऋषी कपूर जैसा ही लगता था। ऋषी कपूर की मैंने बहुत सारी फिल्में देखी। अजूबा, अमर अकबर एंथनी, प्रेम ग्रंथ मुझे बहुत अच्छी लगती थी। मुझे उनके बोलने का ढंग, स्टाइल सब बहुत पसंद आते थे। उनकी फिल्म दीवाना में उनका मर जाना मुझे अच्छा नहीं लगा। जब फिल्म शाहरुख खान की एंट्री होती है तो मुझे लगा कि ऋषी कपूर के अब फिल्म अच्छी नहीं रहेगी। पर जब बाद में ऋषी कपूर वापस आ जाते हैं तो मुझे लगा जैसे फिल्म में जान आ गई है। फिर बाद में जब वो दोबारा फिर दिव्य भारती की ज़िन्दगी से चले जाते हैं तब फिर मुझे लगा कि फिल्म का अंत बेकार बनाया है।

पर असल में मुझे ये सिर्फ भावुकता की वजह से लग था था। ऋषी कपूर के लिए मेरा इस तरह से भावुक होना उस अनजाने रिश्ते के कारण था जो एक एक्टर और प्रशंसक का होता है। उनके जाने से लगा जैसे एक रिश्ता टूट गया है। उनके निधन के बाद मैंने इंटरनेट पर पड़ेगा की नसीरुद्दीन शाह का भी निधन हो गया है। परंतु वो सिर्फ एक अफवाह थी। राजेश खन्ना, देव आनंद, अमरीश पुरी, कादर खान, शशि कपूर जैसे बड़े बड़े रिश्ते हमसे टूट गए। एक बार मैंने अमिताभ बच्चन जी के बारे में ऐसी ही अफवाह देखी परंतु सच्चाई जान कर मुझे सुकून मिला की शुक्र वो ठीक है। भगवान इन रिश्तों को हमेशा बनाए रखे। आमीन!!

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