इस बार गेहूं के सीजन में पूरा दिन घर पर ही बीतता है। लॉक डाउन ने हमें घर पर रहने पर मजबूर कर दिया है। फिर सोचा घर पर फ़्री रह कर करेंगे भी क्या। हमने सोचा गेहूं ही काट लेते है। खाने लायक अनाज तो हो जाएगा। परंतु लॉक डाउन की वजह से शायद किसान भी जल्दी जल्दी अपनी फसल को कटवा देना चाहते थे इसलिए इक्कादुक्का किसानों को छोड़कर सभी ने कंबाइन मशीन से कटवानी शुरू कर दी।
गर्मी भी जोर पकड़ रही थी। हमारे गांव के साथ वाले गांव ठोल के खेतों में एक किसान ने अपने खेतों में मेथी की फसल बोई हुई थी।
उसने कहा कि तुम सभी मिलकर मेथी की फसल काट दो। हमने कहा कि जैसे गेहूं काटने के बदले अनाज लेते हैं, वैसे ही हम मेथी की कटाई के बदले कनक का अनाज लेंगे। पहले तो उसने आनाकानी सी की फिर उसने कहा कि ठीक है आप काटो, मैं अनाज देने के लिए तैयार हूं।
अगले दिन सुबह 8 बज रहे थे, पिताजी, चाचा का लड़का संजय और चाचा महिंदर सिंह खेत में चले गए। मुझे कुछ काम से जाना था, सो मैंने बाद में आने को बोला। तभी दूसरे चाचा का लड़का विक्की भी कहने लगा कि मैं भी मेथी काटूंगा। फिर में अपना काम निपटा कर वापस आ गया। तभी खेत से पिताजी ने फोन किया की आए हुए चाय बनवा कर ले आना। जैसे ही मैं घर पहुंचा, तो देखा कि महिंदर सिंह चाचा खड़े थे। तब मुझे पता नहीं था कि वो भी मेथी काटने गए थे। मैं और विक्की चाय लेकर खेत में चले गए। खेत में जाकर उन्होंने बताया कि चाचा भी आया था, पर थोड़ा सा काट कर वापस चले गए कि ये मेरे बस का नहीं है। फिर हमने चाय पी। मेथी काटनी शुरू की।
थोड़ी देर में मुझे महसूस हुआ कि विक्की भी तक गया था। वो बार बात खड़ा होकर गांव की तरफ देखने लगता। थोड़ी थोड़ी देर में पानी पीने लगता। मैंने उससे कहा कि मुझे नहीं लगता कि तू दोपहर बाद भी मेथी काटने आएगा। उसने कहा कि नहीं नहीं अब तो शुरू कर दिया है, अब तो पूरी मेथी काटेंगे। मुझे भी लगा कि शायद सच कह रहा है। वैसे थक तो में भी गया था। परंतु फिर सोचा कि अब ओखली में सिर दे दिया है, तो आने दो मुसलों को।
काटते काटते दोपहर हो गई थी। हमने सोचा कि खाना यहीं मंगवा लेते हैं। पेड़ की छाया में बैठकर खा लेंगे, यहीं थोड़ा आराम कर लेंगे। लेकिन विक्की कहने लगा कि की नहीं नहीं घर ही जाएंगे, घर से ही खाना खा कर वापस आएंगे। तब मेरा मथा ठनका और मैंने मन ही मन कहा कि अब ये पक्का नहीं आएगा। खैर थोड़ी देर बाद सभी घर जाने को तैयार हो गए। हम सभी खेतों के बीच में से होते हुए चले जा रहे थे। विक्की गेहूं कि फसल को देखकर बोल रहा था कि मेथी काट कर फिर गेहूं की फसल भी काटेंगे। मैंने कहा कि पहले मेथी तो काट ले। एक दो नहीं बल्कि सवा तीन एकड़ मेथी है।
फिर धीरे धीरे थके मांदे घर को चल पड़े। घर पहुंच कर विक्की तो सबसे पहले नहाया। हमने हाथ मुंह धोकर खाना खाया। इस सीजन में शक्कर को खासतौर पर खाने में शामिल किया जाता है। फिर में खाना खा कर आराम करते हुए सो गया। दोपहर 3 बजे के बाद मेरी आंख खुली तो बाहर चाचा का लड़का संजय आवाज़ें दे रहा था खेत में जाने के लिए। हम भी जाने के लिए तैयार हो गए लेकिन विक्की.....
x

No comments:
Post a Comment