लॉक डाउन में फंसे हुए आज पूरा एक महीना हो चुका है। सभी काम धंधे बन्द पड़े हैं। घर में बैठे बैठे भी ऊब गए हैं। सोचते हैं कि अभी यहीं कोई काम कर लें। गेहूं की कटाई भी शुरू हो चुकी हैं। खेतों में कंबाइन मशीन से कटाई शुरू हो चुकी है। पहले हमने सोचा कि गेहूं काटेंगे। साल भर के लिए अनाज हो जाएगा। स्कूल के समय छुट्टियों में हम सभी घर वाले गेहूं की कटाई करते थे। वैसे धूप में गर्मी की वजह से खेतों में जाने मन ही नहीं करता। लॉक डाउन में ऐसा लग रहा है जैसे पहले वाला समय दोबारा आ गया हो। पर अब लोग हाथ से गेहूं बहुत कम ही कटवाते है। क्यूंकि आजकल मौसम खराब हो रहा है। जल्दी जल्दी फसल की कटाई करके आपना काम निपटाना चाहते हैं। इसलिए कंबाइन मशीन से पूरे सीजन का काम सिर्फ एक या दो दिन में खत्म हो जाता है। इस बार हमने गेहूं तो नहीं काटी। पर काम भी करना ज़रूरी है। में अपने पिताजी के साथ पास के गांव ठोल के खेतों में गेहूं के खेत के पास खड़ी गेहूं की फसल काटकर रखनी है, जिससे मशीन से काटते समय छूटे नहीं। खेत का मालिक अंबाला में रहता है इसलिए हमने चाय घर से ही मंगवा ली। पहले दिन तो मेरी घरवाली और भानजी स्कूटी पर चाय लेकर आ गए।
हमने पेड़ की छाया में बैठकर चाय पी। चाय पीते हुए ऐसा लग रहा था कि जैसे वहीं पुराने दिन फिर से लौट आए हों। पहले सा अमी ऐसा था जब हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, परंतु आज हमारे पास फोन मौजूद हैं। तो मैंने एक एक फोटो मोबाइल में कैद कर ली। मुझे अंदर ही अंदर ऐसा लग रहा था कि वैसे ही छुट्टियां हो गई है, और हम गेहूं की कटाई कर रहे हैं। दोपहर को में घर आ जाता हूं खाना खाने के लिए, परंतु पिता जी ने अपना खाना खेत में ही मंगवा लिया था। दोपहर बाद मेरे पिता जी ने मुझे भेज दिया कि अब तुम जाओ, बाकी काम में कर लूंगा, तुम जाकर घास का इंतजाम कर लेना। मैं घर आ गया। शाम को 5 बजे फिर खेत में घास लेने चला गया। खेत में बिहारी मजदूर गन्ना छील रहे थे, जिससे वहां से गोले इकट्ठे करके घास में शामिल करने थे। गन्ने के उपरी हिस्से पर को हरे पत्ते लगे होते हैं, उसको हमरे यहां गोला बोलते हैं। फिर बर्शीम काटी। हमारे घर टोका काटने की मशीन नहीं है, इसलिए वहीं से इंजन लगी मशीन में टोका करके के आया। दो दिन खेत में लगा कर ऐसा लग रहा था जैसे पूरा शरीर दर्द का शिकार हो गया हो। परंतु उस दर्द में को अहसास ज्यादा अच्छा लग रहा था जो पुराने दिनों की याद दिला रहा था। पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त...
Saturday, April 25, 2020
दिन वो पुराने याद आए, छुट्टियों के दिन लौटाए
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