Wednesday, April 15, 2020

याद करते हैं हम अपनी गुस्ताखियां, भूल हुई क्या हमसे।राहें बदल ली जिंदगी की उसने, भूल हुई क्या हमसे।नाराजगी भी होती तो मिट सकती थी, पर ना मिटने वाली कालिख लगा बैठे।जान बिछा देते राहों में, बोला तो होता।अरसा गुजर गया सोचते सोचते, आखिर... भूल हुई क्या हमसे।

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उम्मीद का दीया

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