आज मैं बैठा लैपटॉप पर कुछ सर्च कर रहा था। तभी मेरी नज़र एक ऑनलाइन अख़बार की वेबसाइट पर लगी एक खबर पर पड़ी, जिसमें पेट्रोल के दाम के बारे में बताया गया था। मैंने उस खबर को खोल के देखा तो उसमें लिखा था कि मुंबई में पेट्रोल 90 रूपये पार कर गया है। मैंने आगे खबर ही नहीं पढ़ी, क्या फायदा, आज मैंने भी अपनी बाइक में पेट्रोल डलवाना है। कल डलवाया था 100 रूपये का पेट्रोल, आज ख़त्म भी हो गया। आज सुबह सेक्टर 34 जाना था।
मैं बाइक लेकर सेक्टर 41 वाले पेट्रोल पंप पर गया तो वहां लम्बी लाइन लगी हुई थी, मैंने सोचा, सेक्टर 42 वाले पेट्रोल पंप से डलवा लेता हूँ। पर वहां भी लाइन लगी हुई थी। सेक्टर 34 से वापस आते समय सोचा सेक्टर 43 से डलवा लूँ, पर वहां ध्यान ही नहीं रहा, कब पेट्रोल पंप निकल गया। असल में मेरा मन ही नहीं कर रहा था पेट्रोल डलवाने को, जबकि बाइक में पेट्रोल कम था। क्यूंकि इतना महंगा पेट्रोल कैसे डलवाये कोई, पर मज़बूरी है, 100 को पार कर जायेगा, तब भी डलवाएंगे। और बोलते भी रहेंगे कि इतना महंगा हो गया है।
जब पेट्रोल 50 का एक लीटर था, तब भी 100 रूपये का ही डलवाना, 60 का हो गया, तब भी 100 का ही डलवाना, 70 का हो गया तब भी 100 का ही डलवाना। तब शायद इतना फर्क महसूस नहीं होता था। लेकिन अब तो हद ही हो गयी है। जब 90 रूपये के पास पहुँच गया है। अब भी 100 का डलवाएंगे तो हर रोज़ ही डलवाना पड़ेगा। और अगर किसी दिन बाइक कुछ ज्यादा चल गयी तो शायद एक दिन में दो दो बार न डलवाना पड़ जाये। इसलिए अब 100 का फंडा तो छोड़ना पड़ेगा।
मुझे तो ऐसा लगता है कि आने वाले समय में 100 का पेट्रोल डलवाएंगे तो बाइक भी कहेगी कि मुझे घर में खड़ी कर दो। 100 का पेट्रोल डलवाके मुझे रोज़ स्टार्ट करके मेरी आवाज़ सुन कर फिर बंद कर दिया कर। इससे ज्यादा कुछ नहीं हो सकता।
मुझे याद है जब पहले पेट्रोल पंप से 20-25 रूपये पेट्रोल मिलता था। आज उससे चार गुना ज्यादा महंगा हो गया है। पर शायद आम लोगों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता होगा क्यूंकि कहीं भी विरोध करने वालों में आम लोग नहीं होते, जब भी कहीं विरोध हो रहा होता है, तो किसी न किसी राजनीतिक पार्टी के लोग ही होते हैं। अब तो ऐसा लगता है कि ये पेट्रोल के दाम अब कभी रुकने का नाम नहीं लेंगे। बढ़ते जायेंगे, बढ़ते जायेंगे, और वाहनों के पहिये रुकते जाएंगी। और एक दिन ऐसा आएगा कि फिर से लोग बैलगाड़ियों का इस्तेमाल करना शुरू कर देंगे।
काश वो दिन भी आये और इस टेक्नोलॉजी भरी पत्थर की दुनिया से निजात मिले और फिर से वही हरा भरा वातावरण पनपने लगे। खैर, मेरे बोलने लिखने से तो कुछ होने वाला नहीं, आप भी जाओ पेट्रोल पंप पर और पेट्रोल डलवाओ, मैं भी जा रहा हु, 100 रूपये का पेट्रोल डलवाना है, नहीं तो बाइक घर पे ही खड़ी करनी पड़ जाएगी।

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