Friday, June 15, 2018

हैप्पी बरसात !


आज गर्मी बहुत ज्यादा लग रही है। बादलों में सूरज भी कम ही दिखाई दे रहा है। पर सूरज तो सूरज है, अपनी हठ कैसे छोड़ सकता है। गर्मी बरसा कर लोगों को परेशान करना ही उसका काम है। दो तीन दिन से आसमान में धुल का गुबार फैला हुआ है। दिन में रात जैसा अहसास हो रहा है और रात को दिन जैसा आभास होता है। क्यूंकि दिन में धुल ने सूरज को ढका हुआ है और रात को धुल सफेद चादर ने रात के अँधेरे को भी प्रकाशनुमा किया हुआ है। पर आज गर्मी ने ये कहने पर मजबूर कर दिया है कि हे रब मींह तो बरसा दे। इस धुल की चादर को सिर्फ बरसात ही साफ़ कर सकती है। सूरज तो इस धुल को जला नहीं सकता, उसे तो खुद धुल ने ढक लिया है। दिन भर गर्मी में बाइक पर घूमना भी ऐसा लगता है जैसे कोई सज़ा मिली हुई हो। आज प्यास भी बहुत लग रही है। पंचकूला से बाइक पर आते हुए सेक्टर 17  के पास से गुजर रहा था। मैं सोच रहा था कि इतने दिनों से लोग छबील लगा रहे हैं, पर आज कहीं भी छबील नहीं मिली। प्यास ने बुरा हाल किया हुआ है। जैसे मेरे कहने की देर थी कि सरकारी प्रेस के पास छबील लगी हुई मिल गयी। मैंने तभी बाइक को मोड़ कर टेंट के सामने लगा दिया। दो गिलास ठन्डे पानी के पिए तो जा के प्यास बुझी। कहते हैं कि जब हम दिल से मांगते हैं तो भगवान उसे हमारी झोली में डाल ही देता है। पानी पी कर मैं अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ चला। आज कहीं भी जाते हैं तो पानी साथ ले कर चलना पडता है। क्यूंकि पहले की तरह आज कहीं भी पानी पीने को आसानी से नहीं मिलता। हम चलते जाते हैं, कि थोड़ा आगे चलके देखते हैं, पानी मिलेगा तो पिएंगे। पहले तो हर जगह पानी आसानी से मिल जाता था। नलकूप होते थे, जिनको हाथ से चलाया और पानी बाहर। जी भर कर पानी पी सकते थे। आज तो नलकूप कहीं देखने को भी नहीं मिलते। सरकार ने नलकूप कि जगह नल लगाए हुए हैं।  पर उनमे पानी टाइम टाइम से आता है। ये नहीं कि जब प्यास लग रही हो, तभी चलाया और पी लिया। या फिर टंकियां लगा दी, उनमे से जब मर्ज़ी पानी पी सकते हैं, पर वो पानी कैसे होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं। उस टंकी में कितनी गंदगी होगी, पता नहीं, क्यूंकि सरकार ने एक बार अपना काम किया उसके बाद भगवान भरोसे। आज दो दिन हो गए आसमान में धुल को उड़ते हुए। मुझे कल किसी बन्दे ने बताया कि ये धुल अफ़ग़ानिस्तान से आयी है। ईरान, इराक होते हुए, राजस्थान, दिल्ली और अब हरियाणा और पंजाब में पहुंच गयी है।  जितने मुंह, उतनी बातें। पर शायद आज किसी धर्मात्मा बन्दे ने भगवान से प्रार्थना कि होगी कि बारिश कर दे। क्यूंकि इतने दिन से हम प्रार्थना कर रहे हैं, और भी सारे लोग बारिश की मांग कर रहे थे पर भगवान था कि किसी की सुनने को राजी ही नहीं था। जैसे उसे भी किसी की सिफारिश का इंतज़ार था। आज सुबह 2 बजे से झम झमाझम बारिश हो रही है। और धुल धरती पर आ गिरी है। सुबह अपनी बाइक को साफ किया, बहुत मिटटी थी। अभी भी बादल झूम रहा है बरसने  को तैयार खड़ा है। मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरे लिखते लिखते ही बरस पड़ेगा। चलो अब बारिश का आनंद लेते हैं। कहीं मेरे कहने से बादल को नज़र ना लग जाये। आप भी बरसात का आनंद लीजिये। हैप्पी बरसात!

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