Friday, March 23, 2018

अलिफ़ लैला की तयब्बा जब हमारे घर आयी ....





हमारी ज़िंदगी में इंसानों के साथ-साथ जानवर भी बहुत महत्व रखते हैं। जैसे हमारा उनके प्रति लगाव गहरा होता है, उनका लगाव भी हमारे प्रति गहरा हो जाता है। वो भी हमारी तरह ही सहानुभूति की आशा रखते हैं। वो भी हमसे प्यार पाना चाहते हैं। जैसे कुत्ता जब छोटा होता है, तब वो साथ रहता है, फिर वो छोड़कर नहीं जाता। हमारे घर में भैंस, गाय, बिल्ली, कुत्ते पाले होते थे। मेरी छोटी बहन सीमा को जानवरों से खास लगाव था। 

घर में बिल्ली के बच्चे रहते थे। वो मम्मी से छुपकर उनको दूध पिलाती थी, खाना खिलाती थी।  सीमा उनके नाम रखती थी। जैसे टीवी में धारावाहिक आते हैं, उनमे जो नाम होते हैं, वो उनके नाम उन पर रख देती थी। जैसे तनु, तयब्बा, तैयब, और भी बहुत सारे। हमारी भैंस की कटड़ी का नाम तय्यबा रखा हुआ था। जो अलिफ़ लैला में सिंदबाद की कड़ी से लिया था। जब कभी बिल्ली के बच्चे तंग करते थे, जैसे दूध पी जाना, खाना झूठा कर देना। तो उनके पीछे हम डंडा लेकर भागते थे उनको वहां से खदेड़ने के लिए। पर वो जाकर सीमा के पास छिप जाते थे। जैसे उसको जा के बोलते होंगे कि हमें बचा लो, वो हमें मारेंगे। जैसे वो आपस में एक दूसरे की भाषा समझते हों। जब हम रात को सो रहे होते थे तो बिल्लियां हमारी रज़ाई के ऊपर आ के सो जाती थी। कई बार उनको निचे भी गिराया, डराया भी, पर वो थी की मानती ही नहीं थी। 

सवेरे हमारी रज़ाई के ऊपर ही सोई हुई मिलती थी। पर सीमा उनको अपने साथ अपनी रज़ाई में सुलाती थी। वो बोलती थी की इनको भी तो ठण्ड लगती है। सोने दो बेचारियों को। कई बार तो उनसे इतनी खीझ चढ़ती थी कि उनको भगा दें वहां से। सीमा उन्हें बहुत प्यार करती थी। तैयब्बा (कटड़ी) के लाड लड़ाती थी। जब वो उनके पास से गुजरती थी, उसको देख के तैयब्बा रिंगने लग जाती थी। दो कुत्ते काले रंग का और भूरे रंग के पाले हुए थे। काले वाला धर्मेंदर और भूरे रंग वाला जितेंदर। 

हमने धर्मवीर फिल्म देखी थी, जिसमे धर्मेंदर और जितेंदर होते थे। उनके नाम पर हमने उनके नाम रखे थे। वो बहुत लाड लड़ाते थे। उनको हम झिड़कते भी थे, तो जैसे उनको पता होता था कि ये गुस्से में है या प्यार में झिड़क रहा था। वो उल्टा लेटनियाँ खा के मनाने की कोशिश करते थे। और उनकी ये चालाकियां देख कर मन से गुस्सा भाग जाता था। 

काले रंग का कुत्ता गायब हो गया था। कई दिन बाद पता चला कि किसी ने उसे लाठी से मार दिया है। वो तो किसी को भौंकता भी नहीं था। जैसे भगवान ने उसे सिर्फ प्यार के लिए ही बनाया हो। क्या बिगाड़ा था उसका धर्मेंदर ने। फिर कुछ दिन बाद जितेंदर भी कहीं चला गया। शायद उनकी जोड़ी ही ऐसे थी, एक दूसरे से बिछड़ कर नहीं रह पायी। जब सीमा की शादी हो गयी तो बिल्लियां जैसे हमारे घर का रास्ता भी भूल गयी। जानवर भी इंसान की तरह प्यार के भूखे होते हैं। वो भी हमसे वैसी ही अपेक्षा करते हैं, जैसी हम दूसरों से करते हैं।

No comments:

Post a Comment

उम्मीद का दीया

  एक घर में पाँच दीये जल रहे थे।  उनकी रोशनी से पूरा घर जगमगा रहा था। हर दीया अपने भीतर एक अलग संदेश और एक अलग भावना लिए हुए था। पहला दीया उ...