Tuesday, March 20, 2018
गज़ब का मैच था वो .....
मुझे क्रिकेट मैच देखने का बहुत शौक है। जब भी भारत का मैच चलता हो, फिर चाहे कोई भी काम हो, बस दिल करता है कि काम छोड़कर मैच ही देखते रहें। जब मैच हमारे मुताबिक नहीं होता तो निराशा भी होती है। और जब हमारे मुताबक होता है, जैसा हम चाहते हैं, तो ख़ुशी इतनी होती है कि बस पूछो ही मत। हाल ही में भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश का टी 20 ट्राई सीरीज ख़त्म हुई। जिस दिन भारत का बांग्लादेश के साथ फाइनल मैच था उस दिन मैं घर गया हुआ था। मैच शाम को 6 बजे के आसपस शुरू हुआ था। मुझे पता भी नहीं था कि आज मैच है। मैं ताया जी के घर बैठा था। मुझे उनके घर से टीवी में मैच की आवाज आ रही थी। मैंने अंदर जा के देखा तो मैच की हाइलाइट्स दिखा रहे थे। मुझे लगा कि शायद मैच ख़त्म हो गया है, अब तो कोई फायदा नहीं। पर जब पता चला कि अभी तो बांग्लादेश की पारी ख़त्म हुई है, अब भारत की बैटिंग आएगी। मैं जल्दी से अपने घर भागा और जा के टीवी चलाया। काफी देर सर्च करने के बाद मुझे चैनल ही नहीं मिला। मुझे लगा कि शायद हमारे टीवी में वो चैनल ही नहीं आएगा। तभी मेरे भाई ने बताया कि मैच तो 238 नंबर पर आता है। मैंने जल्दी से वो चैनल लगाया तो वहां मैच शुरू होने ही वाला था। वैसे तो मैच नार्मल ही चल रहा था। रोहित शर्मा अच्छा खेल रहा था। शिखर धवन जल्दी ही आउट हो कर पेवेलियन लौट गया था। भारत की 2 विकेट 32 रन पर सिमट गयी थी। रोहित शर्मा ने 56 रन बनाये। सुरेश रैना ने कोई खाता भी नहीं खोला था। टी 20 मैच में अच्छा ये होता है कि उसमे शॉट देखने को मिलते हैं। चौके और छक्कों की तो मानो बरसात होती है। भारत मैच जीतने के नज़दीक जा रहा था कि फिर कोई न कोई विकेट उड़ जाती, और फिर से पीछे रह जाता। कई बार तो दिल करता था कि बस अब नहीं जीतेंगे, टीवी बंद ही कर देना चाहिए। मनीष पांडे अच्छा खेल रहे थे, कि वो भी आउट हो गया। अब क्रीज़ पर शंकर और दिनेश कार्तिक थे। मैच जीतने के लिए 2 ओवर में 35 रन बनाने थे। दिनेश कार्तिक ने आते ही पहली गेंद पर छक्का जड़ दिया। सब देखते ही रह गए, कि ये क्या हो गया। अब भारत के प्रशंसकों को आशा की एक किरण दिखाई दे रही थी दिनेश कार्तिक के रूप में। दिनेश कार्तिक ने भी दर्शकों को निराश नहीं किया। अगली गेंद में चौका जड़ दिया। उससे अगली गेंद में फिर से छक्का मार कर गेंद को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। अब बांग्लादेश के खिलाडियों में कानाफूसी होने लगी। अब क्या किया जाये। उसके बाद एक और चौका मार कर और 2 रन लेकर दिनेश कार्तिक ने स्कोर को 35 से 18 कर दिया था। उसने 1 ओवर में 22 रन जड़ दिए थे जो इस मैच का 1 ओवर का सबसे बड़ा स्कोर था। अब ओवर खत्म हो गया था। शंकर स्ट्राइक पर आ चुके थे। सभी बोल रहे थे कि दिनेश को स्ट्राइक दो। अगले ओवर की गेंद डाली गयी तो डॉट बॉल हो गयी। अब चिंता बढ़ती जा रही थी। शंकर ने 1 रन लेकर दिनेश को स्ट्राइक दी तो दिनेश कार्तिक ने फिर से चौका जड़ दिया। फिर 1 रन लिया और स्ट्राइक फिर से शंकर के पास आ गयी। शंकर ने भी चौका मार कर स्कोर को थोड़ा सा सरकाया। अगली गेंद पर भी शंकर ने चौका लगाना चाहा पर गेंद को फील्डर ने कैच कर लिया और शंकर के प्रयास को मिट्टी में मिला दिया। शंकर आउट हो कर चला गया। अब गेंद 1 बची थी और रन 5 बनाने थे। कुमेंट्री करने वालों को भी नहीं पता चल रहा था कि दिनेश किस तरफ खड़ा है। स्ट्राइक किसके पास है। सभी सोच रहे थे कि अब क्रीज़ पर नया खिलाडी वाशिंगटन है। और ये मैच तो गया हाथ से। मैंने भी अपना हाथ रिमोट की तरफ बढ़ा दिया था, कि अब तो टीवी बंद कर देता हूँ। पर जैसे ही स्ट्राइक के लिए तीर का निशान वाशिंगटन से हट कर दिनेश कार्तिक के पास चला गया तो मैंने रिमोट को छोड़ दिया। जैसे सबके मन कि बात भगवन ने सुन ली हो और स्ट्राइक बदल कर दिनेश को दे दी। और अब मैच की आखरी गेंद घूमती हुई आ रही थी दिनेश कार्तिक की तरफ। सभी दर्शक साँसे थाम कर बैठे थे। मैच किसी भी समय पलट सकता था। अगर चौका भी लगता तो मैच ड्रा होता, जीतने के लिए छक्के की ज़रूरत थी। जैसे ही गेंद आयी दिनेश कार्तिक ने घुमा दिया अपना बल्ला और गेंद को पहुंचा दिया बाउंड्री लाइन के बाहर 6 रनों के लिए। सारे दर्शक झूमने लगे। ड्रेसिंग रूम से सारे खिलाडी बाहर मैदान में दौड़ कर आ गए। सबने आ कर दिनेश कार्तिक को बाँहों में उठा लिया। दिनेश कार्तिक ने 8 गेंद पर 29 रन बना बनाये। उसने 2 चौके और 3 छक्के लगाए। यह एक गज़ब का मैच था। ऐसा मैच कभी कभी ही देखने को मिलता है। घर में सब सो गए थे। मैं अकेला ही ये मैच देख रहा था। ख़ुशी जाहिर करने के लिए भी कोई चाहिए होता है। अकेला बंदा ख़ुशी भी कैसे मनाये। मैं बाहर गली में आ गया कि शायद कोई मिल जाये जिसके साथ ख़ुशी सांझी की जा सके। बाहर गली में ताया जी का लड़का मिल गया। उससे साथ ख़ुशी सांझी की, दो चार बातें की मैच के बारे में और जा के बिस्तरे में सो गए।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
उम्मीद का दीया
एक घर में पाँच दीये जल रहे थे। उनकी रोशनी से पूरा घर जगमगा रहा था। हर दीया अपने भीतर एक अलग संदेश और एक अलग भावना लिए हुए था। पहला दीया उ...
-
ज़िंदगी सिर्फ साँस लेने का नाम नहीं है… ज़िंदगी वो है जो साँसों के बीच में हम महसूस करते हैं। लेकिन जब मन की ख़्वाहिशें, सपने, इच्छाएँ...
-
गर्मियों की छुट्टियों का वो दिन आज भी दिल में ताज़ा है। गाँव की वो लंबी, धूल भरी कच्ची सड़क — जिसके दोनों ओर कतार में लगे जामुन के पेड़ जैसे...
-
पानी में गेंद गिरने पर डंडे से निकालते हुए खिलाड़ी आज एक बार फिर मैच खेलने निकल पड़े। अब किसी के पास समय ना होने के कारण कुल द...

No comments:
Post a Comment