Monday, March 19, 2018

क्या धर्म की जगह पर भी ऐसा हो सकता हैं, विश्वास नहीं होता


कई बार हमारे सामने ऐसे किस्से आ जाते हैं कि हमें उन पर विश्वास करना मुश्किल लगता है। हम समझ ही नहीं पाते कि जो हमारी आँखों के सामने हो रहा है क्या ये सच में हो रहा है। ना चाहते हुए भी उन पर विश्वास करना पड़ता हैं। ऐसा ही एक किस्सा मेरे सामने भी आया। मैं मोहाली एक अख़बार के दफ्तर में काम करता था। एक दिन मैं दोपहर को 3  बजे दफ्तर जाने के लिए कमरे से निकला। थोड़ी दूर जा के एक गन्ने के रस की रेहड़ी देख कर मैं रुक गया। गर्मी होने के कारन प्यास भी लग रही थी।  मैंने गन्ने का रस पिया और जैसे ही दफ्तर के लिए चलने लगा तो एक लड़के ने मुझसे कहा कि भैईया मुझे 20  रूपये दे दो, खाना खाना है, भूख लगी हैं।  मैंने सोचा कि इनका तो काम यही है, हर किसी से खाने के नाम पर पैसे मांगते रहते है। मैं मना करके चलने लगा। पर मुझे लगा कि ये लड़का लग तो पंजाबी रहा हैं, पर हिंदी बोल रहा हैं। पंजाब के लड़के तो भीख नहीं मांगते। या तो इसकी कोई मज़बूरी होगी या फिर ये नशे का आदी होगा जो अपनी नशे कि ज़रूरत पूरी करने के लिए पैसे मांग रहा हैं। फिर मैंने उसे टालने के लिए कहा कि ये पास में गुरद्वारा है, वहां से खा लो लंगर, कोई मना नहीं करेगा। मैं उसके साथ पंजाबी बोल रहा था। फिर वो भी पंजाबी में बात करने लगा। उसने कहा कि मैं गया था गुरद्वारे में, पर उन्होने मुझे मार के भगा दिया। मुझे उस की बात पर विश्वास नहीं हुआ। मैंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता तू झूठ बोल रहा है। तुझे पैसे नहीं दूंगा मैं। उसने फिर कहा कि गेट पैर बन्दे ने मुझे डंडे से मारा और भगा दिया। मैंने कहा कि मेरे साथ चल, तू झूठ बोलता है। मैं उसे ले के जैसे ही गुरद्वारे के गेट के सामने पहुंचा, तो गेट पर बैठा सिक्ख बंदा एक मोटा डंडा लेकर आया और उसे मेरे सामने ही मारने लगा। मैंने उसे रोका और पूछा कि क्यों मार रहे हो इसे, ये तो खाना मांग रहा था। उसने कहा कि ये चोर है, जूते चुराता है। सिक्ख बन्दे ने उससे कहा कि मैंने तुझे मना किया था कि यहां मत आना, तेरी टांगें तोड़ दूंगा। फिर उसने उसको मारने कि कोशिश की। मैंने रोका तो डंडा मेरे कंधे पर लगा। वो डंडा भी कोई छोटा मोटा डंडा नहीं था, चारपाई का सेरवा था। मुझे भी बहुत ज़ोर से लगा। मैंने उससे कहा कि अगर ये चोर होता तो आपसे डंडा खाने दोबारा क्यों आता यहाँ। इसने खाना खाना है, खिला दो। सिक्ख बन्दे ने जो जवाब दिया उसे सुनकर मुझे भी विश्वास नहीं हुआ कि इस तरह के इंसान भी हैं, वो गुरु घर के अंदर। उसने कहा कि यहां कोई होटल है, जो इसे खाना खिला दू, यहां तो किसी का भोग है। उसके शब्द सुनकर मुझे विश्वास नहीं हुआ कि कोई सिक्ख बंदा ये शब्द बोल रहा है। मैंने सोचा कि अगर इके साथ यहां बहस करेंगे तो बात बढ़ जाएगी और मैं धर्म के नाम पर कोई बात भी नहीं करना चाहता। क्यूंकि धरम पर होने वाली बहस कभी खत्म नहीं हो सकती। तभी मैंने उस लड़के को 20  रूपये निकाल कर दिए, और कहा कि ये लो पैसे कुछ खा लेना, और दोबारा इनके पास मत आना मार खाने। ये घटना मैंने अपने दोस्तों को सुनाई तो उन्होंने विश्वास नहीं किया की कोई सिक्ख बंदा ऐसा नहीं कर सकता। पर ये मेरे सामने की घटना हैं, जो मैं चाहते हुए भी नहीं भूल सकता।

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