पुरी (ओडिशा) में समुद्र के किनारे एक मंदिर है, जिसे
Bedi Hanuman Temple कहा जाता है।
यहाँ हनुमान जी को “बंदी हनुमान” भी कहा जाता है।
कथा क्या कहती है?
कहते हैं कि जब Jagannath जी का मंदिर बना,
तो समुद्र की लहरें बार-बार मंदिर के पास आकर
उसे नुकसान पहुँचाने लगीं।
तब भगवान ने Hanuman जी को आदेश दिया —
“तुम यहाँ रहकर समुद्र की लहरों को रोकना।”
हनुमान जी आज्ञाकारी थे,
उन्होंने समुद्र को रोकना शुरू कर दिया।
कुछ समय बाद हनुमान जी
भगवान राम के दर्शन के लिए वहाँ से चले गए।
उनके जाते ही समुद्र फिर उफान में आ गया
और मंदिर के पास तक पहुँच गया।
तब Jagannath जी ने सोचा —
“हनुमान जी बहुत शक्तिशाली हैं,
पर उनका मन अपने प्रभु राम में ही लगा रहता है।
अगर ये बार-बार चले जाएँगे,
तो मंदिर की रक्षा कौन करेगा?”
इसलिए उन्हें वहाँ प्रतीकात्मक रूप से सोने की जंजीर (बेडी) से बांध दिया गया,
ताकि वे हमेशा वहीं रहकर मंदिर की रक्षा करें।
इसीलिए उन्हें “बंदी हनुमान” कहा जाता है।
- हनुमान जी की सबसे बड़ी पहचान है — भक्ति और सेवा
- भगवान भी अपने भक्त पर भरोसा करते हैं
- “बांधना” यहाँ मजबूरी नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी का प्रतीक है
यह कोई सज़ा नहीं है,
बल्कि एक सम्मान और जिम्मेदारी है —
कि हनुमान जी स्वयं
Jagannath Temple की रक्षा कर रहे हैं।

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