पता नहीं कैसे परखता है मुझे ईश्वर,
परीक्षा भी कठिन लेता है…
और हारने भी नहीं देता।**
ज़िंदगी में कई ऐसे पल आते हैं जब लगता है कि
अब शायद सब कुछ खत्म हो जाएगा।
रास्ते बंद दिखाई देते हैं,
हौसला टूटने लगता है,
और मन बार-बार पूछता है —
“क्यों मेरे साथ ही ऐसा हो रहा है?”
लेकिन फिर कहीं न कहीं भीतर से एक आवाज़ आती है —
शायद यह भी ईश्वर की कोई परीक्षा है।
कठिन रास्ते ही मजबूत बनाते हैं
अगर जीवन हमेशा आसान होता,
तो शायद हमें अपनी ताकत का पता ही नहीं चलता।
कठिनाइयाँ हमें गिराने नहीं आतीं,
वे हमें यह बताने आती हैं कि
हम अंदर से कितने मजबूत हैं।
कभी-कभी ईश्वर हमें ऐसे रास्तों से गुजारता है
जहाँ हर कदम मुश्किल लगता है।
लेकिन वही रास्ते
हमारी आत्मा को और मजबूत बना देते हैं।
ईश्वर की परीक्षा का तरीका
ईश्वर की परीक्षा अजीब होती है।
वह हमें चुनौतियाँ देता है,
पर साथ ही अंदर हिम्मत भी भर देता है।
वह हमें मुश्किलों के समुंदर में उतार देता है,
पर तैरने की ताकत भी दे देता है।
इसीलिए कई बार लगता है —
परीक्षा भी कठिन है,
लेकिन हारना भी मुमकिन नहीं।
हार के बाद भी उम्मीद क्यों बची रहती है
कई बार हम टूट जाते हैं,
रोते हैं,
थक जाते हैं।
लेकिन फिर भी अगली सुबह
हम उठकर फिर से चल पड़ते हैं।
शायद यही ईश्वर का सबसे बड़ा सहारा है —
वह हमें गिरने देता है,
पर टूटने नहीं देता।
इसलिए अगर आज जीवन कठिन लग रहा है,
अगर रास्ते भारी लग रहे हैं —
तो याद रखिए…
शायद ईश्वर आपको
एक बड़ी जीत के लिए तैयार कर रहा है।
क्योंकि
जिसे ईश्वर मजबूत बनाना चाहता है,
उसकी परीक्षा भी कठिन लेता है।
और अंत में वही इंसान मुस्कुराकर कहता है —
“पता नहीं कैसे परखता है मुझे ईश्वर,
परीक्षा भी कठिन लेता है…
और हारने भी नहीं देता।”

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