Thursday, September 18, 2025

एक अनहोनी अनुभव – सच्चाई या सपना?

ये घटना मेरे भांजे विजय के साथ घटित हुई थी, जिसे मैं आपके सामने शेयर कर रहा हूं। मैंने 2018 में अपनी B.Com की पढ़ाई राजीव गांधी गवर्नमेंट कॉलेज, साहा से पूरी की थी। उस समय मैं एक साधारण छात्र था, लेकिन मेरे साथ जो घटना 2017 में हुई, वह मेरे जीवन की सबसे रहस्यमयी याद बन गई।

यह घटना मैंने आज तक किसी को नहीं बताई। न अपने दोस्तों को, न ही अपने परिवार को। लेकिन आज परिस्थितियाँ ऐसी हैं कि मुझे लगा, इस अनुभव को आप सबके साथ साझा करना चाहिए। हो सकता है कोई मुझ पर विश्वास करे, हो सकता है कोई इसे कल्पना माने। लेकिन जो मेरे साथ हुआ, वह मेरे लिए बिल्कुल हकीकत था।


घटना की शुरुआत

यह मार्च 2017 की बात है। उस दिन मैं अकेले कॉलेज जा रहा था, क्योंकि मेरा दोस्त कॉलेज नहीं आया था। जब मैं साहा बस स्टैंड पहुँचा और कॉलेज की ओर बढ़ा, तभी अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी दूसरी जगह पहुँच गया हूँ।

मेरे ठीक पास मेरा वही दोस्त खड़ा था, जो उस दिन कॉलेज आया ही नहीं था। हम दोनों एक बड़े से बाजार में खड़े थे, पास में एक वैन थी जिसमें जूते बिक रहे थे। मेरे दोस्त ने मुझसे कहा –
“ये चमड़े के जूते ले ले।”

जूते मुझे पसंद भी आ गए, लेकिन जैसे ही मैंने उन्हें पहना, वे मेरे पैरों में बड़े थे। मैंने दुकानदार से छोटा साइज़ दिखाने को कहा। तभी अचानक वह दुकानदार अपनी वैन लेकर गायब हो गया। जूता मेरे हाथ में ही रह गया और मैं हैरान खड़ा रह गया।


मंदिर और दोस्त का बदलता व्यवहार

इसके बाद हम दोनों एकदम से दूसरी जगह पहुँचे – एक पार्क के पास, जहाँ सामने एक मंदिर था। मैंने अपने दोस्त से कहा –
“चलो, मंदिर में माथा टेकते हैं।”

लेकिन उसने साफ मना कर दिया। उसने मुझे भी मंदिर में जाने से रोका। मुझे यह बहुत अजीब लगा। आखिर क्यों मेरा दोस्त मंदिर जाने से बच रहा था? क्या वह सच में मेरा दोस्त था?


अजीब रेलवे स्टेशन

फिर अचानक मैं खुद को एक रेलवे स्टेशन पर पाया। यह स्टेशन बहुत सुनसान था, बाजार बहुत दूर था और माहौल बेहद अजीब लग रहा था। यहाँ मेरा दोस्त एक अनजान लड़के के साथ था। दोनों मेरे पास से थोड़ी दूरी बनाकर बैठे थे।

उन्होंने मुझे कुछ नमकीन खाने को दी, लेकिन वह नमकीन बहुत अजीब लग रही थी। जब मैंने उसे खाने की कोशिश की, तो मेरा मन ही नहीं हुआ। प्लेट मेरे हाथ से नीचे गिर गई। तभी मेरे गले में पहना भगवान शिव का "ॐ" का लॉकेट बाहर आ गया।

जैसे ही लॉकेट दिखाई दिया, अचानक सब बदल गया। मैं खुद को फिर साहा बस स्टैंड पर अकेला बैठा हुआ पाया। मेरे दोस्त का कोई निशान नहीं था।


सच्चाई का खुलासा

थका-हारा मैं अपने गाँव लौट आया। लेकिन शाम को जब मैं गली से घर जा रहा था, तो मेरे सामने मेरा वही दोस्त बाइक पर खड़ा था। उसने कहा –
“आज तू इतनी देर से क्यों आ रहा है? मैं तो कॉलेज गया ही नहीं था।”

उस समय मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई। जिस दोस्त को मैं पूरे दिन अपने साथ समझ रहा था, वह वास्तव में कॉलेज गया ही नहीं था।


अनुभव का अर्थ

बाद में मैंने "फियर फाइल्स" जैसा शो देखा और एक्सपर्ट्स की बातें सुनीं। तभी मुझे समझ आया कि इंसान की दुनिया के साथ-साथ एक और अदृश्य दुनिया भी है – आत्माओं और शक्तियों की। हो सकता है मैं उसी के चक्कर में फँस गया था।

चमड़े का जूता देना, मंदिर में जाने से रोकना, अजीब रेलवे स्टेशन पर ले जाना और डरावनी नजरों से देखना – यह सब किसी शैतानी शक्ति का खेल था। शायद भगवान शिव की कृपा और मेरे गले का "ॐ" लॉकेट ही था जिसने मुझे उस अनहोनी से बचा लिया।


यह घटना मेरे लिए किसी सपने जैसी नहीं थी, यह मेरी ज़िंदगी का सबसे रहस्यमयी सच था। बहुत से लोग इसे कल्पना समझेंगे, लेकिन जिसने ऐसा अनुभव किया है, वही इसकी गंभीरता समझ सकता है।

एक बात मैं साफ समझ गया – चाहे कोई भी शक्ति हो, भगवान से ऊपर कोई नहीं।

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