Friday, August 22, 2025

"मीठे पोचे" वाला जसविंदर भल्ला नहीं रहे – हुआ एक युग का अंत

एडवोकेट ढिल्लो ने कला कोट अवे नी पाया, 

छनकाटा सीरीज की ऑडियो एंड वीडियो कैसेट

चाचा चतरा
न जाने ओर कितने ही मशहूर डायलॉग हैं जो हम सभी के जेहन में बसे हुए हैं, उनकी शक्ल देखकर ही मन बागोबाग हो जाता था। आज वो नहीं थे

जसविंदर भल्ला, जिन्हें हम प्यार से “चाचा चतरा सिंह” और “एडवोकेट ढिल्लों” के नाम से जानते थे, का शुक्रवार, 22 अगस्त 2025 की सुबह मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में निधन हो गया। वे 65 वर्ष के थे और एक संक्षिप्त बीमारी के बाद उनका निधन हुआ है।

उनकी अंतिम संस्कार क्रिया 23 अगस्त 2025, दोपहर 12 बजे बलौंगी श्मशान भूमि, मोहाली में संपन्न होगी, जहाँ परिवार, मित्र और फिल्म जगत के साथी उनके अंतिम दर्शन करने आए।

जसविंदर भल्ला को बुधवार शाम एक ब्रेन स्ट्रोक (मस्तिष्काघात) हुआ, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी स्थिति खराब होती चली गई, और वे सुबह करीब 4:00 बजे अंतिम सांस लेकर इस दुनिया को अलविदा कह गए।

उनके निधन से पंजाबी मनोरंजन जगत में गहरा शोक फैल गया। अनेक फिल्मी सितारों और प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं:

  • अभिनेता गिप्पी ग्रेवाल ने भावुक पोस्ट लिखते हुए कहा, "आप पिता के समान थे... आपकी विरासत और प्रभाव कभी भूलाया नहीं जा सकता"।

  • पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लिखा, "‘चाचा चत्रा’ हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे"– एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

  • अभिनेत्री सोनम बाजवा ने कहा, "आपके साथ काम करने का सम्मान मिला, आपकी ऊर्जा हमेशा याद रहेगी"

जसविंदर भल्ला सिर्फ एक कॉमेडियन नहीं थे; वे एक शिक्षाविद, प्रोफेसर, और भाषा-संस्कृति के दर्पण थे। उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) से मास्टर और डॉक्टरेट की उपाधियाँ ग्रहण कीं, और एक्सटेंशन एजुकेशन विभाग में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वे मई 2020 में सेवानिवृत्त हुए थे.

कॉमेडी की शुरुआत उन्होंने 1988 में ‘छनकाटा’ ऑडियो सीरिज के साथ की, और फिर उन्होंने फिल्मों में अपनी प्रतिभा बिखेरी – जैसे Carry On Jatta, Jatt & Juliet, Mahaul Theek Hai और Sardaar Ji। खासकर उनका किरदार ‘एडवोकेट ढिल्लों’ ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।

उनकी एक वीडियो, "चाचा मीठे पोचे मारदा" तो लाजवाब थी, समाज के ऊपर व्यंग्य, कटाक्ष करने की कला ही निराली थी। 

जसविंदर भल्ला सिर्फ एक कॉमेडियन नहीं थे – वे पंजाब की संस्कृति, हंसी और आत्मीयता का जीता जागता रूप थे। उनके पात्रों ने न केवल हमें हँसाया, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक बोध भी जगाया। उनका जाना एक युग के अंत जैसा है।

उनकी हँसी भरी विरासत और शिक्षण की प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शित करती रहेगी। उनकी याद हमेशा हमारे दिलों में रहेगी।

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