ज़िंदगी दुखों और सुखों का संगम है। हमारी ज़िंदगी में दुःख हैं तो ही सुखों का अहसास होता है। अगर ज़िंदगी में सिर्फ सुख हों तो सुख का महत्व ही समझ में नहीं आता। दुखों में भी हमें मुस्कराकर दुःख का सामना करना चाहिए। सुख में हमें दुःख को भूलना नहीं चाहिए। कई बार इंसान अपनी ज़िंदगी में दुखों को पाकर हताश हो जाता है। प्रकृति का नियम है की रात का अँधेरा हमेशा नहीं रहता। रात के बाद सुबह ज़रूर होती है। इंसान को इस दुःख रुपी रात को धैर्य से बिताना चाहिए और हमेशा अपने मुख पर मुकराहट के फूल खिलते रखना चाहिए। काँटों में रहकर ही फूल मेहफ़ूज़ रह पता है। अगर कांटे ना हों तो कोई भी आकर उस फूल को पल भर में तोड़ के चला जाये। वो कांटे ही हैं जो उस सुख रुपी फूल को सुरक्षित रखते हैं। स्थिति चाहे कैसी भी हो हमें अपने चेहरे पर मुस्कान का फूल खिलाके रखना ही पड़ेगा। प्यासे इंसान को ही पानी का महत्व ज्यादा पता होता है। प्यास लगने पर ही पानी की एक बूँद भी उसके लिए खज़ाना जान पड़ती है। ज़िंदगी हमें भगवान् से मिला अनमोल तोहफा है। ये हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हमें उसे कैसे बिताना है। हम ज़िंदगी के अनमोल तोहफे को दुखों की रात समझ कर जीना ही छोड़ दें तो आने वाले सुख से वंचित रह जायेंगे। अगर हम ये समझ लें की दुःख और सुख तो आने जाने हैं, हमें दुःख में ज्यादा दुखी और सुख में ज्यादा खुश नहीं होना चाहिए तो ज़िंदगी आसान हो जाती है। बड़े बड़े विद्वानों ने ज़िंदगी के जीने के फलसफे को लेकर अनेकों किताबें लिखी हैं। आज इंटरनेट का ज़माना है, हमें इंटरनेट पर वो सब कुछ मिल जाता है जो हम खोजना चाहते हैं। विद्वानों के लिखे हुए ज़िंदगी से जुड़े रोचक पहलु, ज़िंदगी जीने के सिद्धांत सन्देश के रूप में इंटरनेट पर उपलबध हैं। सकारात्मक सोच को अपनाकर हम अपनी ज़िंदगी में कैसे आगे बढ़ सकते हैं। जब कभी हमें अपनी ज़िदगी में अंधकार नज़र आने लगे तो महापुरुषों की ज़िंदगी से जुड़े तथ्य पढ़ कर अपनी ज़िंदगी में उतार लें तो ज़िंदगी को समझने में आसानी होगी। दुःख और सुख एक ही सिक्के के दो पहलु हैं जो एक दूसरे से अलग नहीं हो सकते। जहां दुःख हैं, वहीं सुख है। दुःख और सुख सबकी ज़िंदगी में आते हैं। इससे जुड़ा एक कोट्स मुझे याद आ रहा है:
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कहते हैं बुरा वक़्त सबका आता है,
कोई निखर जाता है, कोई बिखर जाता है।
कोई निखर जाता है, कोई बिखर जाता है।
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