Tuesday, April 17, 2018

आतंकवाद ऑनलाइन


आज के युग में सोशल मीडिया ने इंसान की ज़िंदगी में अहम् जगह बना ली है। फेसबुक, व्हाट्सप्प के बिना ज़िंदगी में कोई कमी सी लगती है। किसी वजह से जब किसी दिन इंटरनेट बंद रहता है और पूरा दिन बिना व्हाट्सप्प और फेसबुक के गुजरता है तो ज़िंदगी का जैसे कोई जरूरी हिस्सा छूट गया लगता है। आज इंटरनेट बंद है, पता नहीं व्हाट्सप्प पर क्या आया होगा, फेसबुक पर पता नहीं कौनसी नई जानकारी आयी होगी। लोग इनका इस्तेमाल बिना सोचे समझे कर रहे हैं। आज की ज़िंदगी में इनका बहुत महत्व है, एक ज़रूरी हिस्सा बन चुके हैं। टेक्नोलॉजी ने इंसान की ज़िंदगी में बहुत तरक्की ला दी है। इंसान ने इनके इस्तेमाल से अपनी ज़िंदगी की रफ़्तार जैसे बढ़ा दी है। घर बैठे हर जानकारी उसे मिल रही है। फेसबुक उसे दुनिया की सारी जानकारी घर बैठे दे रही है, पर वो है कि अपना इतना सा भी दिमाग इस्तेमाल नहीं करता कि ये सच है या झूठ। बस जो फेसबुक पर आ गया, उसे ही सच मान बैठा है। और बिना सोचे समझे आगे फॉरवर्ड कर देता है।
किसी शहर से एक लड़का लापता हो गया था। उसके दोस्तों ने उसकी फोटो फेसबुक पर डाल दी। साथ में लिख दिया कि ये लड़का कल से लापता है, जिसे भी मिले उसे घर पहुंचा दे। पता और फ़ोन नम्बर भी दे दिया। साथ में लिखा दिया कि इस पोस्ट को इतना फैलाओ, इतना शेयर करो कि ये लड़का इसके माँ बाप तक पहुंच जाये। शाम वो लड़का वापस घर आ गया। पर फेसबुक पर जो फोटो डाली थी, लोगों की रहमदिली की वजह से पुरे भारत में फैला दी गयी। लोगों ने बड़े ज़ोर शोर से पोस्ट को शेयर किया, हर किसी ने अपने दिल की ममता दिखाई और पोस्ट को शेयर किया। कुछ दिन बाद लड़के का घर से निकलना बंद हो गया। क्यों? क्यूंकि फेसबुक पर पोस्ट फैली हुई थी। जब भी घर से बाहर जाता, लोग उसे पकड़ कर घर छोड़ जाते। रहमदिली, इंसानियत जो थी लोगों के दिलों में। और फेसबुक 2 साल बाद भी लोगों को जागरूक कर रही है कि ये लड़का लापता है, हर कोई शेयर कर रहा है। सलूट करता हूँ, फेसबुक का इस तरह से इस्तेमाल करने वालों को। लोगों को जैसे इनके सिवाय कोई काम ही नहीं रहा आज। किसी के गुम हुए कागज़ात मिल जाते हैं तो उनकी फोटो खींच के फेसबुक पर डाल देते हैं और साथ में लिख देते हैं कि इस पोस्ट को इतना फैलाओ कि कागज़ात इसके असली मालिक तक पहुंच जाएँ। और लोग भी उसको शेयर करते रहते हैं, कागज़ात को उसके असली मालिक तक पहुंचा के ही रहते हैं। शायद पोस्ट डालने वाले को ये नहीं पता कि उन कागज़ातों पर पता लिखा होता है। अगर उसके दिल में इतनी ही दया होती है, तो वो उन कागज़ातों को डाकखाने से पोस्ट भी कर सकता है। पर उसकी पोस्ट डाकखाने में नहीं, फेसबुक पर होती है। आज दरयादिली सिर्फ फेसबुक के लिए ही रह गयी है। फेसबुक पर ही मोमबत्ती मार्च निकाल देते हैं, फेसबुक पर ही श्रधांजलि दे देते हैं। धरम के नाम पर लोग फेसबुक पर लड़ रहे हैं। हिंदुस्तान के लिए लाइक बढ़ा के पाकिस्तान को घर बैठे ही हरा देते हैं। मुझे लगता है कि आज इंटरनेट की वजह से दूरियां घट गयी हैं पर शायद दिलों में नफरत बढ़ गयी है। क्या ये आतंकवाद से कम है? ये इंटरनेट आतंकवाद के नाम से जाना जायेगा। जैसे अमरीका घर बैठे ड्रोन से सीरिया में हमला करता है, वैसे ही लोग घर बैठे इंटरनेट का गलत इस्तेमाल करके हमला कर रहे हैं। नफरत फैला रहे हैं। अगर आप के पास कोई काम नहीं है तो कृपया करके इस तरह के घटिया काम भी मत करो। लोगों को शांति की ज़िंदगी जीने दो। मेरी सभी से यही अपील है।

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