Thursday, March 15, 2018

बाइक की छलांग लगवा कर बना शक्तिमान


कई बार हमसे गलती हो जाती है, पर हमें उसका अहसास बाद में होता है। मैं जब भी बाइक पर चलता हूँ, तो हमेशा ख्याल रखता हूँ कि कोई गलती न हो। ऐसे ही एक घटना हुई थी मेरे साथ। मेरी ही गलती थी, किसी को कोई दोष भी नहीं दे सकते। रात को 10 :30  बजे अपनी ड्यूटी ख़त्म करके मैं गांव जाने के लिए तैयार हो गया। शनिवार रात को 10  बजे निकलता हूँ दफ्तर से, और साढ़े 11 बजे घर पहुंच जाता हूँ। इतवार की छुट्टी होती थी, तो सोमवार को सवेरे वापस चंडीगढ़ आ जाता था। उस दिन आंधी चल रही थी। आंधी बहुत तेज थी, इस बात का डर भी था कि रास्ते में पेड़ भी गिरे हो सकते हैं। बरसात होने का डर भी लग रहा था। मैं दफ्तर से निकल गया था। अम्बाला पार करके नग्गल के पास पहुंचा था। मुझे सामने एक सफेदे का पेड़ गिरा हुआ नज़र आया जो आंधी में गिर गया था। सड़क के बीच में पड़ा था। मुझे लगा की शायद छोटी छोटी टहनियां ही हैं, इनके बीच में से निकल जाऊंगा। मैंने अपने पैर लेग गॉर्ड  पर रख लिए और बाइक की रेस बढ़ा दी। जैसे कि बाइक की छलांग लगवानी हो। उसके बाद मुझे तभी पता चला जब मैं सड़क पर घिसटता जा रहा था। टहनियों के बीच में एक मोटा तना भी था, जो मुझे नज़र नहीं आया और उससे टकरा कर बाइक दूर जा गिरी। मैं भी साथ में सड़क पर घिसटता जा रहा था। मैंने सड़क पर अपने हाथ लगाए हुए थे अपने आप को रोकने के लिए। जब मुझे लगा कि अब नहीं रुक सकता तो मैंने हाथ हटा दिए। फिर मैंने दो तीन पलटियां खायी और सड़क पर रुक गया। मैंने उठ कर देखा तो बाइक मुझसे भी आगे जा के रुकी थी। बड़ी मुश्किल से मैं उठा अपना बैग संभाला और बाइक को उठाया। बाइक की लाइट टूट गयी थी। एक इंडिकेटर जल रहा था। वहां से घर अभी 10  किलोमीटर दूर था। उसके सहारे मैं वहां से घर तक पहुंचा। घर में किसी को पता न चले इसलिए धीरे से बाइक को साइड में खड़ी कर के चारपाई पर कम्बल ले के बैठ गया। मेरे ताया जी की लड़की कमलेश आयी हुई थी। वो अभी सोये नहीं थे। उनको मेरे आने का पता था, इसलिए मुझसे मिलने के लिए आ गयी। वो मुझे समझाने लगी कि रात को नहीं चला करते, सो बात हो सकती है और तू तो किसी को बताता भी नहीं कि मेरे साथ ऐसा हुआ है। मैं सोच रहा था कि वैसे तो अब भी मेरे साथ वैसा ही हुआ है। थोड़ी देर में परवीन (मेरी घरवाली) को मेरी बाजु नज़र आ गयी। उस पर खून लगा हुआ था। उसने कंबल को हटा दिया। मुझे भी तभी पता चला कि मेरी बाजु पर बहुत चोट लगी थी। बस फिर क्या था, सब इकठा  हो गए। तभी मेरी आँखें छलछला गयी। आँखों में पानी भर आया। फिर ताया जी का लड़का छज्जू आया और उसने बाजु पर पट्टी बंधी और दवाई दी। मैं सोच रहा था कि मेरी ही गलती थी, जिस वजह से ये एक्सीडेंट हुआ। उस समय तो मैं मानो शक्तिमान ही बन गया था, बाइक को सफेदे के ऊपर से छलांग लगवाने लगा था। उस दिन मैंने अपने आप को समझाया कि आगे से कभी भी ऐसी गलती नहीं करनी। कभी शक्तिमान नहीं बनना। हमें तो दुःख होता ही है, हमारे घरवालों को भी बहुत दुःख होता है हमें इस हालत में देख कर।

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