जैसे ही एंकर ने मेरा नाम पुकारा, पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। ऐसा लग रहा था मानो हजारों लोग एक साथ मेरा इंतजार कर रहे हों। चारों तरफ मोबाइल की फ्लैशलाइटें चमक रही थीं। लोगों का शोर मेरे कानों में संगीत की तरह सुनाई दे रहा था। उस पल मुझे अपनी मेहनत सफल होती हुई महसूस हो रही थी।
मैंने मुस्कुराते हुए स्टेज पर कदम रखा। सामने बैठे हजारों लोगों की तरफ हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया। फिर माइक के पास जाकर कहा, "आप सभी का दिल से धन्यवाद। आज जो प्यार आप मुझे दे रहे हैं, मैं उसके लायक तभी बन पाया हूँ क्योंकि आपने हमेशा मुझ पर विश्वास किया। यह सम्मान सिर्फ मेरा नहीं, उन सभी लोगों का है जिन्होंने मेरे सफर में मेरा साथ दिया।"
तालियों की आवाज पहले से भी ज्यादा तेज हो गई। कुछ लोग मेरा नाम पुकार रहे थे, कुछ लोग मेरे पोस्टर लहरा रहे थे। उस पल मेरी आँखें भर आईं।
मैंने बोलना जारी रखा, "आज मैं मेक्सिको के इस विशाल स्टेडियम में अपनी परफॉर्मेंस देने जा रहा हूँ। लेकिन यकीन मानिए, यहाँ तक पहुँचने का रास्ता बिल्कुल आसान नहीं था।"
इतना कहते ही मेरी आँखों के सामने बीते हुए दिन घूमने लगे। मुझे अपना वह छोटा-सा कमरा याद आ गया, जहाँ एक पुरानी कुर्सी, एक साधारण मोबाइल और ढेर सारे अधूरे सपने हुआ करते थे। मैं घंटों वीडियो बनाता था। कभी आवाज खराब आ जाती, कभी लाइट चली जाती, कभी रिकॉर्डिंग खराब हो जाती। कई बार पूरी मेहनत बेकार चली जाती, लेकिन अगले दिन फिर से शुरू कर देता।
लोग कहते थे, "इससे कुछ नहीं होगा।"
कोई हँसकर बोलता, "इतनी मेहनत अगर नौकरी ढूँढने में कर लेता तो अब तक कहीं लग गया होता।"
कुछ रिश्तेदार कहते, "मोबाइल में लगा रहता है, जिंदगी में कुछ नहीं करेगा।"
उनकी बातें बुरी जरूर लगती थीं, लेकिन शायद वही ताने मेरी सबसे बड़ी ताकत बन गए। मैंने ठान लिया था कि एक दिन ऐसा काम करूँगा कि यही लोग मेरी सफलता पर गर्व करेंगे।
दिन महीनों में बदले, महीने सालों में बदल गए। धीरे-धीरे लोगों को मेरा काम पसंद आने लगा। मेरे वीडियो लाखों लोगों तक पहुँचने लगे। अलग-अलग देशों से संदेश आने लगे। मुझे कई जगहों पर बुलाया जाने लगा। और आज... मैं दुनिया के दूसरे कोने में, मेक्सिको के इस भव्य स्टेडियम के मंच पर खड़ा था।
मैंने भगवान का धन्यवाद किया और मन ही मन अपने माता-पिता को याद किया। अगर उन्होंने हर मुश्किल समय में मेरा साथ न दिया होता, तो शायद मैं आज यहाँ कभी नहीं पहुँच पाता।
तभी मंच के पीछे से आयोजक ने आकर कहा, "सर, आपका समय हो गया है। पूरा स्टेडियम आपकी प्रस्तुति का इंतजार कर रहा है।"
मैंने गहरी साँस ली। माइक को अपने हाथ में मजबूती से पकड़ा। पूरा स्टेडियम शांत हो गया। हजारों लोगों की निगाहें सिर्फ मुझ पर थीं। जैसे ही मैं अपनी परफॉर्मेंस शुरू करने वाला था, अचानक मुझे अपने हाथ में कुछ गर्म-गर्म सा महसूस हुआ।
पहले तो मैंने ध्यान नहीं दिया। मुझे लगा शायद स्टेज की तेज लाइटों की वजह से ऐसा लग रहा होगा। लेकिन कुछ ही पल बाद वह गर्माहट इतनी बढ़ गई कि मेरा हाथ जैसे जलने लगा।
मैं दर्द से जोर से चिल्लाया, "आह...!"
उसी क्षण मेरी आँख खुल गई।
मैंने देखा कि मैं अपने कमरे में बिस्तर पर लेटा हुआ था। सामने मेरी माँ हाथ में गरम चाय का कप लिए खड़ी थीं। वह कब से मुझे जगाने की कोशिश कर रही थीं। चाय का कप मेरे हाथ से छू गया था, इसलिए मुझे गर्माहट महसूस हुई।
माँ मुस्कुराकर बोलीं, "उठ जा बेटा... सुबह के नौ बज गए हैं। कब तक सपनों की दुनिया में रहेगा?"
मैंने इधर-उधर देखा। न कोई स्टेडियम था, न हजारों लोगों की तालियाँ, न मेक्सिको, न मंच।
मैं हल्का-सा मुस्कुराया, चाय का कप हाथ में लिया और मन ही मन कहा—
"आज यह सिर्फ एक सपना था... लेकिन एक दिन मैं इसे अपनी मेहनत से हकीकत जरूर बनाऊँगा।"

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