Thursday, February 19, 2026

उसकी मरज़ी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता… फिर दुख क्यों?”


हम अक्सर सुनते हैं —
“उसकी मरज़ी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता।”

यह वाक्य हमें ईश्वर की सर्वशक्तिमानता का एहसास कराता है।
लेकिन फिर मन में एक प्रश्न उठता है — 



अगर सब कुछ उसकी इच्छा से होता है,
तो दुनिया में इतने दुख, अन्याय और गलत काम क्यों होते हैं?

क्या यह भी उसकी इच्छा है?
या इसमें कोई और गहरा रहस्य छुपा है?


 स्वतंत्र इच्छा का वरदान

ईश्वर ने मनुष्य को केवल जीवन ही नहीं दिया,
बल्कि चुनाव करने की शक्ति भी दी।

अगर इंसान को सही और गलत में चुनने की आज़ादी न दी जाती,
तो वह एक कठपुतली बन जाता।

स्वतंत्र इच्छा (Free Will) ही हमें इंसान बनाती है।
जब कोई गलत काम करता है,
तो वह ईश्वर की इच्छा नहीं,
बल्कि उस इंसान के चुनाव का परिणाम होता है।

ईश्वर ने रास्ते दिए हैं —
चलना हमें है।


 कर्म का नियम

इस सृष्टि में एक अदृश्य नियम चलता है — कर्म का नियम।

जैसा बोओगे, वैसा काटोगे।

दुख हमेशा दंड नहीं होता,
कई बार वह पिछले कर्मों का परिणाम होता है,
या फिर एक सीख होती है।

बीज बोते समय हमें फल नहीं दिखता,
पर समय आने पर वही बीज वृक्ष बनकर सामने आता है।


 दुख: सज़ा नहीं, सीख है

हम दुख को हमेशा बुरा मानते हैं।
पर क्या बिना संघर्ष के विकास संभव है?

सोना आग में तपकर ही कुंदन बनता है।
हीरा दबाव से ही चमकता है।

दुख हमें तोड़ने नहीं,
जगाने आता है।

कई बार वही पीड़ा हमें ईश्वर के और करीब ले जाती है।


 संसार एक परीक्षा स्थल

यह संसार स्थायी नहीं है।
यह एक यात्रा है, एक परीक्षा है।

अगर जीवन में केवल सुख ही सुख होता,
तो इंसान ईश्वर को याद ही क्यों करता?

कठिनाइयाँ हमें विनम्र बनाती हैं।
अहंकार को तोड़ती हैं।
और हमें सच्चाई की ओर ले जाती हैं।


 ईश्वर की योजना हमारी समझ से परे है

हम केवल वर्तमान देखते हैं,
पर ईश्वर सम्पूर्ण चित्र देखता है।

कभी-कभी जो हमें अन्याय लगता है,
वह किसी बड़ी योजना का हिस्सा होता है।

जैसे बच्चा डॉक्टर के इंजेक्शन को दर्द समझता है,
पर माँ जानती है कि वह उसके भले के लिए है।


 फिर हमारी भूमिका क्या है?

अगर सब कुछ उसकी इच्छा से है,
तो क्या हमें कुछ नहीं करना चाहिए?

नहीं।

ईश्वर ने हमें विवेक दिया है —
सही का साथ देने के लिए,
गलत के खिलाफ खड़े होने के लिए।

दुख और अन्याय देखकर चुप रह जाना
भी एक चुनाव है।


“उसकी मरज़ी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता”

का अर्थ यह नहीं कि हर बुराई उसकी इच्छा है।

इसका अर्थ है —
वह अंतिम सत्ता है,
पर उसने हमें कर्म और चुनाव की स्वतंत्रता दी है।

दुख जीवन का हिस्सा है,
पर उसका उद्देश्य हमें गिराना नहीं,
जगाना है।

जब हम समझ जाते हैं कि
हर अनुभव में कोई न कोई सीख छुपी है,
तब शिकायत कम और विश्वास अधिक हो जाता है।



दुख आएँगे,
गलत काम भी होंगे,
पर अंधकार स्थायी नहीं होता।

हर रात के बाद सुबह आती है।

ईश्वर ने हमें केवल परीक्षा के लिए नहीं,
बल्कि प्रकाश बनने के लिए भेजा है।

जब हम सही रास्ता चुनते हैं,
तो शायद वही उसकी सच्ची मरज़ी होती है।

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