Monday, December 21, 2020

बदले की भावना रखोगे तो ऐसा ही होगा!

 जब स्कूल में पढ़ते थे तब हमें कॉमिक्स का बहुत शोक था।  उस समय हमें ऐसा लगता था कि जैसे अगर कॉमिक्स न होते तो हमें मनोरंजन का साधन कहां से मिलता।  क्यूंकि उस समस्य टेलीविज़न भी बहुत काम होते थे।  मुझे कॉमिक्स इकठी करने का बहुत शोक था।  मेरे कॉमिक्स भंडार में लगभग हर प्रकार के कॉमिक मिल जाते थे। चाचा चौधरी, बीरबल के चुटकुले, हंसगुल्ले, चम्पक, राज कॉमिक्स विषहीन नागराज, नागराज, विक्रम बेताल, जासूसी के नावल, इंद्रजाल वगैरा वगैरा लगभग सभी कॉमिक्स मैंने अपने पास इकठे किये हुए थे।  पंचतंत्र की कहानियां मुझे पढ़ने का बहुत शोक था।  आज इंटरनेट पर सर्च करते हुए मुझे एक कहानी मिली जिसे पढ़कर सीख भी मिलती है। 

मैंने सोचा की आप लोगों के साथ उसे शेयर करता हूँ।  चलो कहानी का मजा उठाते हैं। 

एक तालाब में भारण्ड नाम का एक विचित्र पक्षी रहता था । इसके मुख दो थे, किन्तु पेट एक ही था । एक दिन समुद्र के किनारे घूमते हुए उसे एक अमृतसमान मधुर फल मिला । यह फल समुद्र की लहरों ने किनारे पर फैंक दिया था । उसे खाते हुए एक मुख बोला---"ओः, कितना मीठा है यह फल ! आज तक मैंने अनेक फल खाये, लेकिन इतना स्वादु कोई नहीं था । न जाने किस अमृत बेल का यह फल है ।"

दूसरा मुख उससे वंचित रह गया था । उसने भी जब उसकी महिमा सुनी तो पहले मुख से कहा----"मुझे भी थोड़ा सा चखने को देदे ।"

पहला मुख हँसकर बोला----"तुझे क्या करना है ? हमारा पेट तो एक ही है, उसमें वह चला ही गया है । तृप्ति तो हो ही गई है ।"

यह कहने के बाद उसने शेष फल अपनी प्रिया को दे दिया । उसे खाकर उसकी प्रेयसी बहुत प्रसन्न हुई ।

दूसरा मुख उसी दिन से विरक्त हो गया और इस तिरस्कार का बदला लेने के उपाय सोचने लगा ।

अन्त में, एक दिन उसे एक उपाय सूझ गया । वह कहीं से एक विषफल ले आया । प्रथम मुख को दिखाते हुए उसने कहा----"देख ! यह विषफल मुझे मिला है । मैं इसे खाने लगा हूँ ।"

प्रथम मुख ने रोकते हुए आग्रह किया ----"मूर्ख ! ऐसा मत कर, इसके खाने से हम दोनों मर जायंगे ।"

द्वितीय मुख ने प्रथम मुख के निषेध करते-करते, अपने अपमान का बदला लेने के लिये विषफल खा लिया । परिणाम यह हुआ कि दोनों मुखों वाला पक्षी मर गया ।

सच ही कहा गया है कि संसार में कुछ काम ऐसे हैं, जो एकाकी नहीं करने चाहियें । अकेले स्वादु भोजन नहीं खाना चाहिये, सोने वालों के बीच अकेले जागना ठीक नहीं, मार्ग पर अकेले चलना संकटापन्न है; जटिल विषयों पर अकेले सोचना नहीं चाहिये।

तो दोस्ती कहानी कैसी लगी, कमेंट में ज़रूर बताना।  अगर आप इसी तरह कहानियों का आनंद उठाना चाहते हैं तो सब्सक्राइब ज़रूर करें।

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