परसों मेरे भांजे (ताया जी की बेटी का सपुत्र) विजय का जन्मदिन था, सो मैंने उसे बधाई देने के लिए फोन किया। मैंने रस्मी बातचीत की। फिर परिवार के सभी सदस्यों से बात की। विजय ने मुझसे कहा कि आपको एक स्टोरी भेजेगा जो मैंने आज ही लिखी है। मुझे लगा कि उसने कोई कहानी लिखी होगी। उसने बताया ये एक सच्ची घटनाएं है को मेरे साथ घटित हुई है परन्तु मैंने कभी किसी के साथ इस बारे में बात नहीं की। उसने कहा कि मैंने कहा कि चलो मुझको वो स्टोरी भेजना। तो अगले दिन उसने मुझे वो स्टोरी भेजी। पढ़के मुझे भी लगा कि उसने वैसे की काल्पनिक रचना बनाई है। जब उसको पूछा कि क्या ये सच में घटित हुआ है। तो उसने कहा कि मुझे पता था कि आप भी विश्वास नहीं करोगे। पर ये सच्ची घटना है। सो आप सब के साथ भी में को स्टोरी सांझी करना चाहता हूं। आज अपने इस ब्लॉग मेरी ज़िन्दगी में उसे पोस्ट कर रहा हूं। पढ़के आप भी सोचना कि क्या ऐसा किसी के साथ हुआ है। पर ये वही जानेगा जिसके साथ ऐसा घटित हुआ हो।
मेरा नाम विजय शर्मा है मैं जिला अम्बाला गाँव बधौली का रहने वाला हूं मैं 23 साल का हु । मैंने 2018 में अपनी B.com की पढ़ाई पूरी की है मैं राजीव गांधी गोवरमेंट कॉलेज साहा में पढ़ता था । अभी नोकरी की तलाश में इधर उधर भटक रहा हु।
यह कहानी मैंने आज तक किसी को नही बतायी यहां तक कि ये बात मैंने अपने परिवार को भी नही बतायी । पर आज दोस्तों कुछ परिस्तिथियां ऐसी हुई कि मुझे लगा कि मुझे अपनी कहानी आप सभी के साथ शेयर करनी चाहिए । आप सबको बतानी चाहिए । दोस्तों ये कहानी ऐसी है जिस पर विशवास करना मुश्किल ही नही नामुमकिन है । पर जो घटना मेरे साथ हुई उसे मैं तो झूठा नहीं मान सकता । अगर आपको लगे मुझपे विशवास हो तो समझ जाओगे की ये सच है या झूठ । ओर जिनको अच्छी ना लगे या विशवास ना हो तो वो बस एक कहानी समझ के आंनद ले सकते हैं । सुनों🙏
मैं कॉलेज साहा में पढ़ता था और ये 2017 में मार्च महीने की बात है मुझे तारीख़ तो याद नहीं है । मैं हर रोज की तरह कॉलेज जा रहा था । पर हर रोज की तरह मेरे दोस्त मेरे साथ नही थे मैं अकेला ही था उस दिन मुझे कॉलेज से देरी हो गयी थी उस दिन तो जो दोस्त मेरे साथ जाता था वो घर पर रह गया कॉलेज नही गया । तो मैं अकेला ही था जब मैं साहा बस स्टैंड गया तो कॉलेज की तरफ जाने लगा । तो आप यकीन नहीं करेंगे मुझे पता नही क्या हुआ मैं जैसे एक दम एक ऐसी जगह पहुँच गया जिसे मैं जानता नही था । और मुझे ये भी याद नही रहा की मैं कहाँ आया था किस लिए आया था कुछ याद नही रहा । और मेरे साथ मुझे खड़े पाया मैंने अपने उस दोस्त को जो घर से ही नही आया था वो उस वक्त मेरे साथ खड़ा पाया । और जैसे एक बहुत बड़ा बाजार लगा हुआ है रोड के पास ओर हम एक जूते बेचने वाली वैन के पास खड़े थे । तो मेरा दोस्त बोला की तू ये जुते लेले जो कि चमड़े के बने थे । और वो मुझे पसंद भी आ गए जैसे ही मैने जूते को पाँव में डाला तो वो बड़ा था मेरे पाँव में सही नही आ रहा था । तो जैसे ही मैने जूते वाले को कहा कि इस से छोटा जूता दिखा दो तो वो अचानक से वैन लेके चला गया और उसका जूता मेरे हाथ मे ही रह गया मैंने आवाज लगाते हुए वैन का पीछा किया । पर वो वैन वाला अचानक पता ही नही कहाँ चला गया मैंने बहुत ढूंडा पर फिर नजर नहीं आया मुझे समझ नही आ रहा था कि ये क्या हुआ । और मेरा दोस्त भी उस दिन से अलग व्यवहार कर रहा था मेरे साथ । मेरा दोस्त मेरे साथ तो था पर वो ना मेरे साथ ज्यादा बात कर रहा था और ना ही मेरे साथ चल रहा था वो मुझसे कुछ दूरी बनाकर बात कर रहा था । दूरी बनाकर चल रहा था मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या हो रहा है ये मेरे साथ । फिर जैसे अचानक से फिर मैं उस जगह से एक ऐसी जगह चला गया जो मैंने कभी सपने में भी नही देखी थी। और फिर से वोही मेरा दोस्त मेरे साथ पर मुझसे दूर खड़ा था । हम एक पार्क के पास एक रोड पर खड़े थे । और हमारे बिल्कुल सामने एक मंदिर था । पर ये मुझे नही पता था कि वो मंदिर किस देवी या देवता का था । ओर हम थे भी मंदिर के पीछे तो दूर से मैं देख रहा था कि लोग वहाँ पूजा कर रहे थे । और मैं जैसे एक दम पीछे क्या हुआ मैं सब कुछ भूल गया था । और बस मुझे यही लग रहा था कि मैं जैसे यही आया हु ओर कहीं नही। तो मैंने अपने दोस्त को बोला कि चलो मंदिर में माथा टेकने चलते हैं । भगवान का आशीर्वाद लेने चलते हैं ।
पर मेरे दोस्त ने मुझे साफ इन्कार कर दिया । उसने मुझे मंदिर जाने से मना कर दिया । मैंने उसे बहुत बोला कि चलो मंदिर में पर वो ना खुद गया और ना मुझे जाने दिया। मुझे बहुत बुरा लगा । पर मुझे ये समझ नही आ रहा था कि मुझे मेरा दोस्त मंदिर जाने से क्यों रोक रहा था । वो क्यों नही जा रहा था अंदर क्या वो मेरा दोस्त था या फिर कोई और जिससे मैं बिल्कुल अनजान था । और फिर एक बार मेरे साथ वैसे ही हुआ मैं एक बार फिर से ऐसी जगह पहुँच गया जिससे मैं बिल्कुल अनजान ओर बेखबर था । और वो जगह एक रेलवे स्टेशन था पर वो स्टेशन और बाकी स्टेशन की तरह नही था ।
वो स्टेशन बिल्कुल अजीब था वहाँ बहुत दूर बाजार था आस पास सुनसान था बिल्कुल एक बार मैं देखकर हैरान हो गया और थोड़ा डर भी गया 😱 कि ये क्या जगह है और मैं यहाँ क्यों आया हूं । पर फिर मैं सब कुछ भूल गया । ये सब मेरे साथ सुबह से होने लगा था उस दिन ओर अब शाम हो गयी थी । और जैसे मुझे किसी ने मदहोश कर रखा था कि बस मुझे कुछ याद नही रहता था कि मैं कोन हूँ और कहाँ आया हूं। और फिर से वही मेरा दोस्त मेरे साथ वहां भी पर इस बार उसके साथ एक ओर लड़का था जिसे मैं नही जानता था । तो वो कोन था उसके साथ फिर । ओर मैं एक बैंच पे बैठा था
ओर वो दोनों मेरा दोस्त और वो एक अनजान लड़का मेरे पास बैठ गए पर मुझसे दूर दूर दोनो मैने उनसे पूछा कि हम यहाँ स्टेशन पे किस लिए आये हैं तो मेरा दोस्त बोला की यहां से अब हम रेल में घूमने जायेगे तो मैंने बोला की कहाँ ओर अब तो शाम हो गयी हैं मुझे घर जाना है तो वो बोला कि सिर्फ 2 घण्टे में वापिस आ जाएंगे मैंने बहुत पूछने की कोशिश की पर बताया नही कहाँ जाना है । और मेरे मन मे सवाल उठने लगे कि कहाँ जाना है और वो भी इस वक़्त शाम को मेरी समझ नही आ रहा था क्या हो रहा है । वो स्टेशन बहुत ही अजीब था मैंने ऐसा रेलवे स्टेशन नही देखा था । आखिर क्या हो रहा था ये और मैं मानो बस मदहोश था जहां भी मैं एक दम से चला जाता और आंख खुलने पे एक नई जगह जो मैंने कभी नही देखी और मेरा वो दोस्त मुझे कुछ समझ नही आया और मैं चुपचाप बैठा रहा । और फिर वो एक दम से दोनों खड़े हो गए और मेरे पास से उठकर चल पड़े । तो मैंने पूछा कि मुझे अकेला छोड़कर कहाँ जा रहे हो तो बोले कि अभी आते हैं । और मैं वहीं बैठा रहा तो वो सिर्फ 1 या 2 मिनट बाद मेरे पास आये । वो दोनों कुछ खाने की चीज़ लेकर आये थे वो देखने मे नमकीन जैसी लग रही थी । और वो दोनों वैसे ही मेरे पास आकर मुझसे दूरी बनाकर बैठ गए और कुछ नमकीन मुझे दी खाने को और वो दोनों अपनी नमकीन खाने लगे पर मैं नमकीन को देखने लगा क्योंकि वो बहुत अजीब तरह की नमकीन थी पता नही कैसी थी पर वो बहुत अजीब थी ।
मेरा मन बहुत जैसे कर रहा था खाने को पर मैं चाह कर भी उसे खा ही नही पाया जैसे मेरे हाथ ही खाने को तैयार नही हुए । और फिर एक दम से पता नही कैसे मुझसे वो नमकीन नीचे गिर गयी वो नमकीन एक कागज की प्लेट में थी और जैसे ही मेरी नमकीन नीचे गिरी तो मेरे दोस्त और उस लड़के ने दोनों ने मुझे बड़े अजीब तरह से देखा जैसे भयानक तरह से घूर रहे हों 😡 तो मैं नमकीन को उठाने के लिए नीचे झुका तो मेरे गले मे डला हुआ भगवान शिव का ॐ लोकेट बाहर आ गया । मुझे बचपन से ही भगवान शिव की भक्ति करनी अच्छी लगती है तो मैने ॐ अपने गले मे डाला हुआ था । और जैसे ही मैं ऊपर उठा और ॐ बाहर था तो एक दम अचानक से मैंने खुद को वहीं साहा बस स्टैंड पे बैठा पाया । मैं वहां अकेला बैठा था और मुझे कुछ नही पता कि क्या हो रहा था मुझे सब एक सपने की तरह लग रहा था और अब मेरा दोस्त भी नही था साथ मे मैं अब अकेला था और मुझे थकान बहुत हो गयी थी सर दर्द बहुत हो रहा था । तो मैं वहां से उठा और अपने गाँव की बस ली और घर के लिए बैठ गया सारे रास्ते मेरा दिमाग खराब हो रहा था कि मैं आज कहाँ था कहां नही क्या हुआ कैसे हुआ और क्या था ये सब जो हुआ था । तो मेरा गाँव आ गया मैं बस से उतरकर घर जा रहा था शाम हो गयी थी बिल्कुल 6 या 6:30 का टाइम हो गया था । तो मैं रास्ते से घर जा रहा था गली से तो मैं एक दम से सामने देखकर हैरान रह गया मेरे होश उड़ गए । क्योंकि मेरे सामने मेरा वही दोस्त जो मेरे सारा दिन साथ था और वो बाइक पे था मेरे पास आकर रुका ओर बोला की तू आज कॉलेज से इतनी देर से कैसे आ रहा है और बोला मुझे घर मे थोड़ा जरूरी काम था इसलिए कॉलेज नही गया । और मैं बिल्कुल परेशान मैंने उससे बस इतना ही बोला की कल कॉलेज में मिलके बात करेंगे और उसके पास से घर चला गया । और मैं सोच सोच कर बहुत परेशान था कि ये आज क्या हुआ और इस बारे में मैंने घरवालों को भी कभी नही बताया । पर मैं हैरान था कि आखिर वो जगह कोनसी थी कहाँ की थी और वो कौन था जो मेरे दोस्त के रूप में मेरे साथ था । और उसका अचानक ऐसे मिलना चमड़े का जूता देना , फिर मेरे बहुत बोलने पर भी मंदिर के अंदर नही जाना मुझे भी नही जाने दिया आखिर क्यों , ओर फिर एक रेलवे स्टेशन पे जाके घूमने के लिए बोलना ओर वो भी शाम हो गयी थी और उस अजीब नमकीन को लेकर आना और मुझे अजीब ओर भयानक तरीके से घूरना देखना और फिर ॐ के बाहर आते ही मेरा वही आ जाना एक दम जहाँ से गया था । आखिर ये सब क्या था पर ये सब घटना होने के बाद मैं समझ गया था कि ये सामान्य घटना नही बल्कि बिल्कुल असामान्य था एक ऐसी घटना जिस के ऊपर कोई यकीन नही कर सकता था लेकिन मेरे साथ हो चुकी थी । और फिर एक दिन मैं घर मे बैठा TV देख रहा था तो उसमें एक सीरियल चल रहा था वो भूतो का सीरियल था जिसका नाम था फियर फाइल्स उसमे लोगो के साथ हुई सच्ची घटनाएं दिखाई जाती थी । मैंने उस दिन पहली बार देखा वो सीरियल जब सीरियल खत्म हुआ तो उसके बाद उसमें ही एक किसी ऐक्सपर्ट का नाम आया और उनको दिखाया गया उनसे पूछा गया कि ये भूत प्रेत आत्मा ये होती है या नही ओर कैसे क्या कर सकती है तो उन्होंने बहुत कुछ बताया तो मैंने उनकी एक्सपर्ट की बहुत सी वीडियोस देखी फिर मुझे नाम याद नही है अब उनका पर उसके बाद मुझे समझ आया कि जैसे एक्सपर्ट ने बताया कि जैसे इन्सान की दुनिया है वैसे ही शैतान भी है आत्मा भूत प्रेत सब है और बहुत बार कुछ ऐसा समय होता है कि उस समय मे हम अनजाने से उनके चक्कर मे आ जाते है जैसे कि मेरे साथ हुआ था । ओर मुझे सब समझ आया उस दिन मेरे साथ भयानक घटना एक अनहोनी होती पर भगवान की किरपा से ॐ था मेरे पास तो मैं सही सलामत बच गया क्योंकि वो कोई शैतानी शक्ति ही थी कोई प्रेत शक्ति तभी उसने चमड़े का जूता , उसका मंदिर में ना जाना ओर फिर एक भयानक जगह ले जाकर घूमने की बात करना। और फिर ॐ के बाहर आते ही सब कुछ सही हो जाना ये कोई सामान्य घटना नही थी ये एक ऐसी अनहोनी थी जो भगवान की किरपा से नही हुई । क्योंकि कोई भी शक्ति हो क्यों ना हो कितनी भी बड़ी क्यों ना हो पर भगवान से ऊपर ना कोई था ना कोई होगा ।
ये मेरी ऐसी कहानी है जिसे बहुत लोग शायद झूठ समझे लेकिन हर इंसान की ज़िंदगी मे एक घटना ऐसी जरूर हुई होती है जिसपे विश्वास करना कठिन हो जाता है लेकिन जिनके साथ कुछ ऐसा हुआ होता है तो वो मुझे जरूर समझेगें । ओर मैं किसी अंधविस्वास को बढ़ावा नही दे रहा हूं बस जो मेरे साथ हुआ वो आपको इस कहानी से सुनाया है ।
जब में ये कहानी पढ़ रहा था तो मुझे लग रहा था कि शायद बाद ने विजय कहेगा कि फिर मेरी आंख खुल गई और मेरा सपने टूट गया। परंतु उसने ये सपने की बात नहीं एक सच्चाई बोल के मुझे स्टोरी भेजी है।
अब कौन इस स्टोरी को काल्पनिक समझेगा और कौन सच्ची घटना। ये तो वो ही जनता है जिसके साथ घटित हुई हो।
अपना कीमती समय देने के लिए आपका शुक्रिया।
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