Friday, March 9, 2018
तीन महीने का कंप्यूटर कोर्स किया छे महीने में
12th की पढाई पूरी करके आगे कुछ करने की सोचने की तैयारी कर रहा था। क्यूंकि आजकल तो पहली क्लास में जाने वाले बच्चों को भी पता होता है कि वो बड़े होकर क्या बनेंगे, क्या करेंगे। पर हमें तो 12th के बाद भी नहीं पता था की अब आगे क्या करना है। कोई कहता कि कोई काम सीख लो। कोई कहता है कि किसी फैक्ट्री में कोई छोटा मोटा काम देख लो। पर कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या किया जाये। मेरे चचेरे भाई ने अम्बाला से डेंटल का काम सीखा था। उसने बताया कि नाबार्ड की तरफ से सरकार कंप्यूटर कोर्स करवाती है। सस्ता भी है, कर लो। मैंने भी सोचा की चलो यही सीख लेते हैं। कहीं काम आया तो कर लेंगे। 3500 /- 3 महीने की फीस थी। कोर्स भी तीन महीने का ही था।ये भी पता नहीं होता था कि कंप्यूटर सॉफ्टवेयर सीखना है या हार्डवेयर। वैसे फॉर्म में हार्डवेयर लिखवाया था। अम्बाला शहर में प्रेम नगर में स्थित नाबार्ड दफ्तर में दाखला ले लिया। हर रोज घर से सुबह बस से चेले जाना और शाम को 5-6 वापस आना। उस समय अगर कहीं बैंक में कंप्यूटर देख लेते थे तो बड़ी ख़ुशी होती थी आज मैंने कंप्यूटर देखा है। शुरू शुरू में कंप्यूटर सीखने वाला कॉपी में लिखवाता था। बाद में उसने कहा की जो कम्प्यूटर सिखाएगा वो अभी आया नहीं है। ऐसे ही तीन महीने का समय पूरा हो गया, पर सीखने वाला आया ही नहीं। तीन महीने गेम खेल कर वापस आ जाता था। मैं अकेला ही जाता था और अकेला ही वापस आता था। क्यूंकि मेरा कोई ऐसा दोस्त नहीं था जो मेरे साथ कम्प्यूटर सीख रहा हो, या मेरे साथ खिन आता जाता हो। उसी दफ्तर में एक इलेक्ट्रिकल का कोर्स आया हुआ था। कई मकैनिक ये कोर्स कर रहे था। वो बिलकुल फ्री था। मुझे भी कहने लगे की तुम यहां आते तो हो ही, ये कोर्स भी कर लो। मैंने तीन महीने का इलेक्ट्रिक्ल का कोर्स भी कर लिया। सर्टिफिकेट भी मिल गया, कंप्यूटर हार्डवेयर का भी और इलेक्ट्रिकल का भी। पर आता जाता कुछ नहीं था, कि कम्यूटर हार्डवेयर क्या होता है। इलेक्ट्रिकल का कोर्स करने का ये फायदा तो हो गया कि घर में कुछ थोड़ा बहुत बिजली का काम होता है, तो अपने आप ही कर लेता हूँ। कई बार तो टीवी भी खोल के रख देता था। मुझसे ठीक हो गया तो अच्छी बात हैं, नहीं तो खुले को ही मकैनिक के पास ले जाना पड़ता था। जीजा जी मुझे बुलाते रहते थे कि जल्दी चंडीगढ़ आ जाओ। मैं बहाना लगता था कि अभी सर्टीफिकेट नहीं मिला। तीन महीने का कोर्स था, पर मैंने छे महीने लगा दिए। पर कंप्यूटर सीखने वाला ही नहीं आया छे महीने में। फिर मैं चंडीगढ़ चला गया। और आज तक जहां भी मैंने काम किया, कहीं भी कम्प्यूटर सर्टीफिकेट दिखने कि ज़रूरत भी नहीं पड़ी। आज भी कई बार जब अम्बाला में उस सड़क से गुजरते हैं तो वहीं समय सामने आ जाता है, कि ये था हमारा इंस्टिट्यूट। कम्प्यूटर का सारा काम मैंने चंडीगढ़ जा काम करते करते ही सीखा। उस समय कंप्यूटर डोस होता था। उसमे जो गेम खेलता था, मुझे वो बहुत पसंद थी। आज भी कई बार उसे ढूंढ़ने कि कोशिश करता हूँ, काश वो गेम मिल जाये तो डाउनलोड करके रख लूँ।
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